लखनऊ, 25 मई 2026:
यूपी का गो संरक्षण से समृद्धि मॉडल अब दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। कभी सिर्फ धार्मिक आस्था और गोसेवा तक सीमित मानी जाने वाली देसी गायें अब प्रदेश की नई आर्थिक क्रांति का आधार बन चुकी हैं। प्रदेश में देसी नस्लों पर आधारित ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल ने 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा किया है। इसके साथ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दुबई समेत 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की जबरदस्त मांग पैदा कर दी है।
इस बदलाव के केंद्र में ‘हेता’ (HETHA) का एथिकल डेयरी मॉडल है। इसने 1000 से अधिक देसी गायों के जरिए गो संरक्षण को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में बदल दिया है। इस पहल की शुरुआत गाजियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने की। अमेरिका समेत दुनिया की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में 14 वर्षों तक इंजीनियर रहने के बाद उन्होंने कॉरपोरेट करियर छोड़कर गो संरक्षण को मिशन बनाया। आज उनकी 100 सदस्यीय टीम इस मॉडल को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित कर चुकी है।

हेता मॉडल की खासियत यह है कि यहां दूध उत्पादन के साथ देसी गायों के समग्र उपयोग पर काम किया जा रहा है। A2 दूध, बिलौना घी, पंचगव्य उत्पाद, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, हर्बल चाय, कुकीज, लड्डू, स्किन और हेयर केयर उत्पादों से लेकर गोमूत्र अर्क तक करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से मांग बढ़ रही है।
इस मॉडल में वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं माना जाता। उन्हें संरक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। यही कारण है कि यह पहल कारोबार के साथ संवेदनशील और टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उदाहरण बनती जा रही है। पीएम मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं।

प्रदेश सरकार भी इस मॉडल को तेजी से विस्तार देने में जुटी है। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार ऑपरेशन-4 योजना के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान में 2 से 25 गायों तक के पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी देसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष फोकस किया जा रहा है। योगी सरकार का यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा और आक्रामक कदम बन चुका है।






