लखनऊ/सहारनपुर, 11 जून 2026:
देशभक्ति की भावना, जनसहभागिता और ग्रामीण संकल्प का अद्भुत उदाहरण बना सहारनपुर जिले के चकवाली गांव स्थित सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर अब एक आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत के मानचित्र के आकार में निर्मित यह अनूठा सरोवर देश का पहला ऐसा जलाशय माना जा रहा है जिसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति और राष्ट्रप्रेम की भावना को समर्पित किया गया है।
यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना के विकास के लिए पर्यटन विभाग द्वारा इको-टूरिज्म योजना के तहत लगभग 2.43 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। परियोजना का 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। शेष निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए परिसर में आकर्षक पाथवे विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरोवर का सौंदर्यीकरण, पत्थर की बेंचों की स्थापना, आधुनिक साइनेज सिस्टम, विश्राम के लिए गज़ेबो, पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाने वाला वॉच टावर, स्वच्छता के लिए टॉयलेट ब्लॉक तथा स्थानीय व्यंजनों के लिए फूड स्टॉल भी तैयार किए जा रहे हैं।

व्यापक लैंडस्केपिंग और हरित बागवानी के जरिए पूरे परिसर को प्राकृतिक सौंदर्य से संवारा जा रहा है। परियोजना के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के लिए विशेष फाउंडेशन बेस का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह प्रतिमा सरोवर की देशभक्ति से ओतप्रोत पहचान को और सशक्त बनाएगी।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सहारनपुर में पर्यटन गतिविधियां लगातार विस्तार पा रही हैं। वर्ष 2025 में जिले में लगभग 4.60 लाख पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। यह क्षेत्र की बढ़ती पर्यटन संभावनाओं का संकेत है। उनका कहना है कि सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर जैसी अभिनव परियोजनाएं लोगों में राष्ट्रभक्ति और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने के साथ देशभर से पर्यटकों को आकर्षित कर जिले की पहचान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर स्थापित करेंगी।
इस परियोजना से जुड़े चकवाली गांव के नकूल चौधरी बताते हैं कि यह तालाब कभी उपेक्षा का शिकार होकर डंपिंग ग्राउंड में बदलता जा रहा था। गांववासियों के सामूहिक प्रयास, श्रमदान और संकल्प ने इसे नई पहचान दी। आज यह सरोवर जनभागीदारी और सामुदायिक सहयोग का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
करीब 32 मीटर लंबा और 29 मीटर चौड़ा यह सरोवर भारत के मानचित्र के आकार में विकसित किया गया है। इसे देश के सबसे विशिष्ट जलाशयों में शामिल करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद यह स्थल प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। अनुमान है कि पर्यटन गतिविधियों से गांव को प्रतिमाह 50 से 60 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।






