
न्यूज डेस्क, 4 सितंबर 2026:
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने Earth Observation और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक अहम कामयाबी हासिल की है। ISRO का GSLV-F17 मिशन सफल रहा। रॉकेट ने EOS-05 सैटेलाइट को तय कक्षा में पहुंचा दिया। ISRO अध्यक्ष वी नारायणन ने मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि सैटेलाइट सामान्य तरीके से काम कर रहा है।

36,000 किमी ऊंचाई पर तैनाती
EOS-05 को करीब 36,000 किमी ऊंचाई वाले जियो प्लेटफॉर्म पर तैनात किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा Earth Observation सैटेलाइट है जिसे इस तरह के जियो ऑर्बिट प्लेटफॉर्म पर इमेजिंग के मकसद से लगाया गया है। सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
GSLV का सबसे भारी सैटेलाइट, सात साल की तय लाइफ, नौ साल तक चलने की उम्मीद
ISRO अध्यक्ष वी नारायणन के मुताबिक EOS-05 अब तक GSLV रॉकेट से लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट है। लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद इसे तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। EOS-05 की तय मिशन लाइफ करीब सात साल है। ISRO प्रमुख ने उम्मीद जताई कि सैटेलाइट इससे ज्यादा समय तक काम कर सकता है। उन्होंने बताया कि यह चालू वित्तीय वर्ष में ISRO का दूसरा सफल मिशन है।
Gaganyaan पर 8 हजार टेस्ट पूरे
ISRO प्रमुख ने Gaganyaan Mission को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव मिशन से पहले तकनीक को पूरी तरह परखने के लिए बिना क्रू वाले मिशनों पर काम जारी है। अब तक करीब 8,000 टेस्ट पूरे किए जा चुके हैं। इंसानों की सुरक्षा को देखते हुए ISRO पहले तीन Uncrewed Mission पूरा करने की योजना पर काम कर रहा है।
Mission Success!
GSLV-F17 has successfully accomplished its mission, placing EOS-05 into the intended orbit.
Sharing a few memorable moments from the lift-off.
For more information:https://t.co/VneB2jgZoY#GSLVF17 #EOS05 #ISRO pic.twitter.com/kv0zB6V5Vi
— ISRO (@isro) September 3, 2026
इस वित्तीय वर्ष छह और लॉन्च का लक्ष्य
ISRO ने चालू वित्तीय वर्ष में छह और लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। Gaganyaan के पहले बिना क्रू वाले मिशन की तैयारियां भी चल रही हैं। मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले सभी जरूरी सिस्टम की टेस्टिंग पर खास फोकस किया जा रहा है।






