
बिजनेस डेस्क, 4 सितंबर 2026:
भारत की GDP Growth Rate को लेकर चल रही बहस के बीच विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने 7.8% की आर्थिक वृद्धि पर सवाल उठाने वाले तर्कों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि कुछ लोग नए GDP आंकड़ों को लेकर ऐसे निष्कर्ष निकाल रहे हैं, जिनका आधार सही तुलना पर नहीं है। मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध आर्थिक संकेतकों को देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर मजबूत नजर आती है।
पहली तिमाही में 7.8% ग्रोथ
सरकार की ओर से 31 अगस्त को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत की Real GDP Growth 7.8% रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह दर 6.9% थी। पहली तिमाही में Real GDP का अनुमान 81.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये था। Nominal GDP Growth 10.3% रही।
विवाद की असली वजह क्या है
GDP के आंकड़ों पर सवाल मुख्य तौर पर नई GDP सीरीज आने के बाद उठे हैं। फरवरी 2026 में सरकार ने 2022-23 को Base Year बनाकर GDP की नई सीरीज जारी की थी। इसके बाद पिछले साल की पहली तिमाही के Current Price GDP का आंकड़ा करीब 86 लाख करोड़ रुपये से संशोधित होकर करीब 80 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इसी बदलाव को आधार बनाकर कुछ आलोचकों ने कहा कि पिछले साल का बेस नीचे आने की वजह से इस साल की Growth Rate ज्यादा दिखाई दे रही है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इसी आधार पर 7.8% की जगह करीब 2.6% की Growth का तर्क दिया। सरकार ने इस तुलना को गलत बताया है, क्योंकि दोनों आंकड़े अलग GDP सीरीज से जुड़े हैं।
पुराने आंकड़े से सीधी तुलना सही नहीं
मिश्रा ने भी इसी तर्क पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि अगर जून 2025 के पुराने GDP बेस को लेकर जून 2026 की Growth Rate निकालने की कोशिश की जाती है तो यह नई सीरीज के आंकड़ों की सही तुलना नहीं होगी।
नई सीरीज में केवल Base Year नहीं बदला गया है। Data Sources, Price Indices, Calculation Methodology समेत कई स्तरों पर बदलाव किए गए हैं। सरकार के मुताबिक नई सीरीज में Manufacturing GVA के लिए Double Deflation Method का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें उत्पादन की कीमतों के साथ Intermediate Consumption यानी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों को अलग-अलग देखा जाता है।
7.5% की Growth संभव क्यों बता रहे मिश्रा
मिश्रा का आकलन है कि Fiscal Policy यानी सरकार के खर्च-राजस्व से जुड़ी नीति, Monetary Policy यानी ब्याज दरों से जुड़ी नीति अगर तटस्थ रहती हैं, तब भी भारत की Trend Growth करीब 7% से ऊपर रह सकती है। उनके मुताबिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो यह 7.5% तक पहुंच सकती है।

उनका तर्क सिर्फ GDP के एक आंकड़े पर आधारित नहीं है। उन्होंने ऐसे High-Frequency Indicators का हवाला दिया, जो रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर दिखाते हैं। इन आंकड़ों में वाहन बिक्री, टैक्स कलेक्शन, बैंक क्रेडिट, कंस्ट्रक्शन गतिविधियां शामिल हैं।
अगस्त में कार-SUV की बिक्री 35% बढ़ी
मिश्रा ने अगस्त के वाहन आंकड़ों को खास तौर पर सामने रखा। उनके मुताबिक कारों व SUV की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 35% की बढ़ोतरी हुई। टू-व्हीलर की बिक्री भी 20% से ज्यादा बढ़ी। Commercial Vehicles की बिक्री में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। उनके मुताबिक ये ऐसे आंकड़े हैं जिन्हें सिर्फ GDP की गणना बदलकर प्रभावित नहीं किया जा सकता।
Commercial Vehicles से भी मिला संकेत
सरकार के GDP आंकड़ों में भी Commercial Vehicle Sales में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 18.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। Three-Wheeler Sales 29.7% बढ़ी। Cement Production Index में 8.9% की Growth रही, जबकि Infrastructure और Construction Goods का IIP 7.2% बढ़ा। ये आंकड़े कंस्ट्रक्शन व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गतिविधियों में मजबूती का संकेत देते हैं।
Tax Collection और Credit Growth पर जोर
मिश्रा ने Tax Collection में सुधार को भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का अहम संकेत बताया। उनका कहना है कि टैक्स से जुड़ा डेटा वास्तविक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा होता है, इसलिए इसे GDP की गणना में बदलाव के साथ जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
As expected, with the fiscal headwinds fading and monetary headwinds (falling credit growth till 1HFY26) becoming tailwinds (credit growth accelerating), GDP growth is surprising on the upside, and should help push up consensus trend-growth estimates to 7%-plus. That is, with a…
— Neelkanth Mishra (@neelkanthmishra) September 3, 2026
उन्होंने Credit Growth में तेजी का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक बैंकिंग सिस्टम से कर्ज की मांग बढ़ना इस बात का संकेत है कि पहले मौजूद Supply-side दिक्कतें कम हुई हैं। इससे आने वाले समय में निवेश व आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल सकता है।
नई GDP सीरीज में क्या बदला
नई GDP सीरीज में 2022-23 को Base Year बनाया गया है। सरकार ने इसके साथ कई नए Data Sources को शामिल किया है। इनमें ई-वाहन से मिलने वाला वाहन रजिस्ट्रेशन डेटा, Producer Price Index, ज्यादा बारीक स्तर का Consumer Price Index, Industrial Production Index, सरकारी वित्तीय डेटा समेत कई स्रोत शामिल हैं।
MoSPI के मुताबिक Quarterly GDP
Estimates में Benchmark-Indicator Method का इस्तेमाल होता है। इसमें पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों को संबंधित आर्थिक क्षेत्रों के प्रदर्शन से जुड़े संकेतकों के आधार पर आगे बढ़ाया जाता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि बेहतर डेटा उपलब्ध होने पर GDP के आंकड़ों में आगे Revision हो सकता है।
Manufacturing की गणना में बड़ा बदलाव
नई सीरीज में Manufacturing GVA की गणना के लिए Double Deflation Approach अपनाई गई है। इसमें उत्पादन से मिलने वाले Output को एक Price Index से Deflate किया जाता है, जबकि उत्पादन में लगी Intermediate Consumption को अलग Price Index से देखा जाता है। सरकार का कहना है कि इससे Manufacturing Sector में वास्तविक Value Addition का अनुमान ज्यादा बेहतर तरीके से लगाया जा सकता है। खासकर तब जब कच्चे माल की कीमतों में बदलाव Finished Products की कीमतों से अलग हो।
कमजोर वेतन वृद्धि पर चिंता
मिश्रा ने अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतकों के साथ एक चुनौती की तरफ भी ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक वास्तविक वेतन वृद्धि अभी उतनी मजबूत नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ अतिरिक्त क्षमता मौजूद है। उनका आकलन है कि इस अतिरिक्त क्षमता को पूरी तरह खत्म होने में कई तिमाहियां लग सकती हैं। इसके बाद अगर Growth Rate लंबे समय तक सामान्य स्तर से ऊपर रहती है तो मांग बढ़ने के साथ Inflation Pressure बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
GDP आंकड़ों की आगे भी होगी समीक्षा
सरकार के मुताबिक GDP Estimates अंतिम आंकड़े नहीं होते। नए डेटा स्रोत मिलने, पुराने आंकड़ों में संशोधन होने या Methodology से जुड़े अपडेट के चलते इनमें आगे बदलाव संभव है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर के GDP आंकड़े 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाने हैं।






