
लखनऊ, 27 जुलाई 2026:
यूपी के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को गिराए जाने के फैसले से प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर सोमवार को अपनी जनता पार्टी ने राजधानी लखनऊ में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता दारुलशफा से विधानसभा घेराव के लिए निकले लेकिन पुलिस ने कुछ दूरी पर बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मांग कर रहे थे। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

धरने के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने जौहर यूनिवर्सिटी को ध्वस्त करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अल्पसंख्यकों की शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं रखती और ऐसे शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है जहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। उनका कहना था कि यदि विश्वविद्यालय पर कार्रवाई होती है तो हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।
पूर्व मंत्री मौर्य ने आरोप लगाया कि सरकार सुनियोजित तरीके से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ उठाया गया कदम केवल एक संस्थान का मामला नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से ध्वस्तीकरण से जुड़े सभी निर्देश तत्काल वापस लेने और शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विवादों से दूर रखने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि, हिरासत में लिए जाने के बाद भी पार्टी नेताओं ने अपने आंदोलन को जारी रखने का संकेत दिया। जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा अब राजनीतिक रंग पकड़ चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।






