
लखनऊ, 3 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के पॉश डालीबाग इलाके में करीब छह साल से बंद पड़ा दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी के भाई एवं सांसद अफजाल अंसारी का बंगला एक बार फिर खुल गया। गैंगस्टर एक्ट के मामले में कुर्क की गई इस संपत्ति की चाबी लखनऊ नगर निगम ने अफजाल अंसारी के परिजनों को सौंप दी। सांसद अफजाल अपनी बेटियों के साथ बंगले पर कब्जा लेने पहुंचे। उन्हें देखकर आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़ी कोठी की साफ-सफाई भी शुरू करा दी गई।
डालीबाग के भूखंड संख्या 14-बी पर करीब 6,700 वर्गफुट में बना यह बंगला अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज बताया जा रहा है। वर्ष 2020 में आपराधिक मामलों के आधार पर प्रशासन ने इसे कुर्क कर सील कर दिया था। बाद में नगर निगम को इसका केयरटेकर बनाया गया और तब से बंगला नगर निगम की निगरानी में था।
हाईकोर्ट से लेकर डीएम के आदेश तक चला मामला
इस संपत्ति की कुर्की के खिलाफ अफजाल अंसारी के परिवार ने पहले जिला जज कोर्ट और फिर एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। स्पेशल कोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को कुर्की आदेश रद्द करते हुए संपत्ति को मुक्त करने का आदेश दिया। शासन ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को मामले का पांच सप्ताह में निस्तारण करने का निर्देश दिया। इसके बाद गाजीपुर के डीएम ने 18 अगस्त को संपत्ति की कुर्की समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। चाबी लौटाने के आदेश के बावजूद कार्रवाई में देरी होने पर अफजाल की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई। इसके बाद नगर निगम को बंगले की चाबी सौंपने के निर्देश मिले। अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने बुधवार को परिजनों को चाबी दिलवाई।
1998 में पत्नी के नाम खरीदी गई थी संपत्ति
दरअसल, गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में इस बंगले को भी कुर्क किया गया था। तत्कालीन डीएम ने 23 अक्तूबर 2022 को इसे बेनामी संपत्ति मानते हुए कुर्की का आदेश दिया था। आरोप था कि अफजाल अंसारी ने संगठित अपराध से अर्जित धन से वर्ष 1998 में यह संपत्ति पत्नी फरहत अंसारी के नाम खरीदी थी। कुर्की के बाद इसकी देखरेख लखनऊ नगर निगम को सौंप दी गई थी।

मुख्य गेट बंद, इसलिए बंधे वाले रास्ते से मिला कब्जा
बंगले की चाबी तो वापस मिल गई लेकिन अंदर पहुंचने के रास्ते में भी पेच था। सील किए जाने के समय कोठी का मुख्य गेट डालीबाग की ओर था। पीछे हैदर कैनाल बंधे की ओर दो अन्य गेट हैं। बगल की जमीन पर अब सरदार वल्लभ भाई पटेल आवासीय योजना के तहत 72 फ्लैट बनाए जा चुके हैं। योजना की बाउंड्री के कारण बंगले का मुख्य गेट घिर गया है।

ऐसे में दीवार तोड़े बिना वहां से प्रवेश संभव नहीं था। इसलिए नगर निगम ने बंधे वाली रोड के गेट से कब्जा दिलाया। इस रास्ते पर पड़ा मलबा भी साफ कराया गया। अब करीब छह साल बाद डालीबाग की यह बंद कोठी फिर से आबाद होने की ओर बढ़ रही है।






