
लखनऊ, 12 सितंबर 2026:
मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल कंटेंट के बढ़ते दौर में अगर आपको लगता है कि किताबों की दुनिया सिमट रही है तो लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर का नजारा आपकी धारणा बदल सकता है। शनिवार को यहां शुरू हुए पुस्तक महोत्सव में किताबों का ऐसा संसार सजा है, जहां हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं की हजारों किताबें पाठकों का इंतजार कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौ दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन किया। 20 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 121 प्रकाशकों के करीब 250 स्टॉल लगाए गए हैं।
उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने उस धारणा को खारिज किया कि डिजिटल दौर ने युवाओं को किताबों से दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि युवा आज भी पढ़ना चाहता है। जरूरत सिर्फ किताबों को उसके हाथ तक पहुंचाने की है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्यिक, रचनात्मक, धार्मिक और महापुरुषों की आत्मकथाएं खरीदने की आदत डालने की अपील की।
युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाने की सलाह
योगी ने युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाने की सलाह दी। उनके मुताबिक किताबें जीवन में नई प्रेरणा और दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अचानक बड़ा नहीं बनता अपितु असफलताओं और संघर्षों से गुजरकर सफलता हासिल करता है। युवाओं को अपनी मंजिल कठिन न मानते हुए अपनी राह खुद तैयार करनी चाहिए और पुस्तक महोत्सव जैसे मंच इसमें मददगार हो सकते हैं।

गांव तक पहुंची किताब, ग्राम सचिवालय बने लाइब्रेरी हब
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की करीब 57,600 ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवालयों में लाइब्रेरी बनाई गई हैं। इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों के साथ डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यानी अब गांव के छात्र और युवा भी अपने ही ग्राम सचिवालय में पढ़ाई और ज्ञान हासिल कर सकते हैं।
योगी ने प्रदेश की भारतीय ज्ञान परंपरा का जिक्र करते हुए नैमिषारण्य, काशी, प्रयागराज और शुकतीर्थ को इसकी समृद्ध विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पहले मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा का वाचन हुआ था।
‘बीमारू’ यूपी से ज्ञान और विकास की नई तस्वीर तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज अपनी विरासत और ज्ञान परंपरा से कटता है तो पहचान का संकट पैदा होता है। एक समय उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहा जाता था, लेकिन पिछले दस वर्षों के सकारात्मक प्रयासों से तस्वीर बदली है और उसके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान के दरवाजे चारों दिशाओं से आने वाले विचारों के लिए खुले होने चाहिए। केवल पाठ्यक्रम पढ़ लेना पूर्ण ज्ञान नहीं है।
लखनऊ में आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में…https://t.co/MyK0j1PTVD
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 12, 2026
उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पढ़ने की अपील की और कहा कि यह सिर्फ विद्यार्थियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो जीवन की अलग-अलग परीक्षाओं और चुनौतियों से गुजरता है।
गोरखपुर ने दिखाई किताबों की असली ताकत
योगी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी आशंका थी कि लखनऊ में युवा पुस्तक महोत्सव में कितनी रुचि दिखाएंगे। लेकिन गोरखपुर में लखनऊ से भी ज्यादा भीड़ पहुंची और पुस्तकों की अधिक बिक्री हुई। इससे स्पष्ट है कि युवा किताबों से विमुख नहीं हुआ है, उसे सिर्फ सही मंच और सुविधा चाहिए। इस बार महोत्सव में स्टॉलों की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो गई है। अगले नौ दिनों में पुस्तक प्रेमियों को किताबों के साथ लेखकों से संवाद, पुस्तक विमोचन और लेखकों की रचनात्मक यात्रा जानने का अवसर भी मिलेगा।
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि शिक्षा स्कूल की चारदीवारी और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। प्रदेश के सार्वजनिक और विद्यालयी पुस्तकालयों को आईटी उपकरणों, डिजिटल सुविधाओं और बेहतर संसाधनों से विकसित किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता जताते हुए कहा कि स्क्रीन हमें दुनिया दिखाती है, लेकिन किताबें दुनिया को समझने की ताकत देती हैं।






