
लखनऊ, 26 सितंबर 2026:
भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को लखनऊ में मोर्चा खोल दिया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, आयोग के भीतर कथित असहमति और SIR की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के फैसलों में पारदर्शिता और संस्थागत सहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को निशाने पर लिया। नेताओं ने 2 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संसद की ओर से कानून बनाए जाने तक नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था तय की गई थी।
कांग्रेस के मुताबिक दिसंबर 2023 में कानून बनने के बाद चयन समिति की संरचना बदल दी गई और CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। 2023 के कानून की धारा 7 में यही व्यवस्था दर्ज है।
पार्टी ने फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार की CEC के रूप में नियुक्ति का भी मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने याद दिलाया कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर असहमति नोट दर्ज कराया था। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होने तक नियुक्ति टालने की मांग की थी।
‘दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति की तो फैसला कैसे हुआ?’
कांग्रेस का सबसे तीखा हमला चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर रहा। पार्टी ने सवाल किया कि यदि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं तो उन आपत्तियों का निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
कांग्रेस ने Form-6 में कथित बदलाव पर भी सवाल उठाया। पार्टी का कहना है कि नए मतदाताओं से पिछली SIR सूची में अपने, माता-पिता या दादा-दादी का नाम होने से जुड़ी जानकारी मांगने की प्रक्रिया का स्पष्ट कानूनी आधार सामने आना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आयोग को चुनाव संचालन की संवैधानिक शक्ति जरूर मिली है लेकिन मतदाता सूची और चुनाव संबंधी कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है। पार्टी ने 2019 में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति का उदाहरण देते हुए भी आयोग के भीतर पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की मांग दोहराई।
मीडिया विभाग के चेयरमैन कुंवर सिंह निषाद ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के चीरहरण की इस साजिश का पर्दाफाश करना नागरिकों का कर्तव्य है। कांग्रेस ने SIR से लेकर CEC की नियुक्ति तक चुनाव आयोग की भूमिका को सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।






