
लखनऊ, 5 अगस्त 2026:
जाम मुक्त और तेज रफ्तार सफर का सपना दिखाकर शुरू किए गए करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही एक्सप्रेसवे धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ा फैसला लेते हुए अगले आदेश तक टोल वसूली पर रोक लगा दी है।
इसके साथ ही एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली पीएनसी कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्रवाई के तहत कंपनी को भविष्य में एनएचएआई की नई परियोजनाएं नहीं मिलेंगी। करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 23 जुलाई को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। लेकिन 26 जुलाई को किलोमीटर-64 के पास सड़क धंसने की पहली घटना सामने आने के बाद लगातार कई स्थानों पर निर्माण संबंधी खामियां मिलीं।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एक ओर की तीनों लेन बंद करनी पड़ीं और वाहनों को दूसरी कैरिजवे पर रॉन्ग साइड से डायवर्ट किया गया। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाले एक्सप्रेसवे पर यह व्यवस्था किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि एक्सप्रेसवे की सभी खामियों को दूर करने में लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसकी पूरी भरपाई निर्माण कंपनी से कराई जाएगी। टोल बंद रहने से होने वाले राजस्व नुकसान की वसूली भी कंपनी से ही की जाएगी। उनका दावा है कि मरम्मत का कार्य 6 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल करीब पांच किलोमीटर का डायवर्जन लागू है और वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है।

एनएचएआई ने मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया है। उनकी जगह बरेली के परियोजना निदेशक नवरत्न को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं पीएनसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंजीनियर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाकर अगले दो वर्षों तक एनएचएआई की किसी भी परियोजना में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

अब पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम दो दिनों में मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल करोड़ों रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों को राहत सिर्फ इतनी मिली है कि मरम्मत पूरी होने तक उन्हें टोल नहीं देना पड़ेगा, लेकिन सुरक्षित सफर की गारंटी अभी भी सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है।






