
लखनऊ, 1 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित प्रबंध नगर आवासीय योजना के धरातल पर उतरने का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है। करीब 18 साल से भूमि अधिग्रहण, मुआवजे की दर और कानूनी विवादों के चलते अटकी इस महत्वाकांक्षी योजना को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना प्राधिकरण (लारा कोर्ट) के फैसले से नई गति मिली है। कोर्ट ने योजना के लिए 1 करोड़ 10 लाख 71 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से प्रतिकर निर्धारित किया है।
बढ़ी हुई मुआवजा दर का योजना की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले असर का आकलन करने के लिए एलडीए उपाध्यक्ष ने संयुक्त सचिव अरविंद उपाध्याय की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी को 15 दिन के भीतर आय-व्यय और अतिरिक्त व्यय भार का परीक्षण कर रिपोर्ट देनी है। इसके बाद प्राधिकरण बोर्ड से अनुमोदन लेकर योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक प्राधिकरण दो वर्ष में अनंत नगर, नैमिष नगर और वरुण विहार जैसी आवासीय योजनाएं लॉन्च कर चुका है। इसी क्रम में अब प्रबंध नगर योजना को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। योजना के आकार लेने से शहर के पूर्वी हिस्से में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
दो हजार एकड़ में बसेगा नया प्रबंध नगर
प्रबंध नगर योजना को एलडीए ने वर्ष 2008 में हरदोई-सीतापुर रोड और आईआईएम रोड के पास प्रस्तावित किया था। करीब 2,000 एकड़ में विकसित होने वाली इस योजना में ग्राम घैला, ककौली और अल्लूनगर डिगुरिया की 840.892 हेक्टेयर भूमि शामिल है। भूमि अधिग्रहण का काम पहले ही किया जा चुका है लेकिन मुआवजे और अदालती विवादों के चलते योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब लारा कोर्ट द्वारा प्रतिकर की नई दर तय किए जाने के बाद किसानों को उसी के अनुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एलडीए सचिव सुशील प्रताप सिंह ने बताया कि योजना से जुड़े कुछ गाटों का विवाद अभी उच्च न्यायालय में लंबित है। इन मामलों में न्यायालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त की जाएगी।
IIM रोड से ग्रीन कॉरिडोर तक कनेक्टिविटी
प्रबंध नगर योजना में आधुनिक आवासीय ब्लॉक, वाणिज्यिक क्षेत्र और हरित गलियारे विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। आईआईएम रोड, ग्रीन कॉरिडोर और हरदोई-सीतापुर बाईपास से कनेक्टिविटी इस योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल होगी। एलडीए के अनुसार योजना के विकसित होने से करीब 2 लाख लोगों को आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।






