
लखनऊ, 6 अगस्त 2026:
यूपी में डायल-108 और डायल-102 एंबुलेंस सेवा के पूर्व ड्राइवरों और कर्मचारियों का दर्द गुरुवार को राजधानी लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर खुलकर सामने आ गया। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए- कोरोना काल में हमें हीरो कहा, अब हम जीरो हो गए। इस दौरान अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते कई कर्मचारी भावुक होकर रो पड़े। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे पूर्व कर्मचारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने दिन-रात जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की। इस दौरान उनके करीब 100 साथियों की मौत भी हो गई लेकिन महामारी के बाद निजी कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। उनका कहना है कि 2021 से वे न्याय और रोजगार के लिए भटक रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 20 हजार एंबुलेंस कर्मचारी कंपनी के तहत कार्यरत हैं। कंपनी लगातार उनका शोषण कर रही है। उनका दावा है कि एंबुलेंस के मेंटेनेंस का खर्च भी कर्मचारियों के वेतन से काटा जाता है। विरोध करने वालों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। कई कर्मचारियों पर फर्जी मुकदमे तक दर्ज करा दिए गए।
प्रदर्शन में शामिल कई पूर्व कर्मचारी अपनी बात कहते-कहते फफक पड़े। उन्होंने गले में लटका कोरोना सम्मान पदक दिखाते हुए कहा कि यह उनकी सेवा और संघर्ष का प्रतीक है लेकिन आज वही बेरोजगार होकर दर-दर भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती के नाम पर ड्राइवरों से 25 हजार और टेक्नीशियनों से 50 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं।

उन्होंने दावा किया कि 2021 में विरोध करने पर 3 हजार कर्मचारियों को निकाला गया था और अब तक करीब 9 हजार लोगों की नौकरी जा चुकी है। कई पूर्व कर्मचारी आज डिलीवरी बॉय सहित छोटे-मोटे काम करके परिवार का पालन-पोषण करने को मजबूर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।






