
लखनऊ, 18 अगस्त 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर मंगलवार को नारों और प्रदर्शनकारियों के आक्रोश से गूंज उठा। यूजीसी नेट परीक्षा में हुई गड़बड़ी, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक प्रकरण और प्रदेश में बिगड़ती महिला सुरक्षा के सवालों को लेकर समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में सरकार विरोधी तख्तियां थामे संगठन से जुड़े दर्जनों छात्रों ने कैंपस परिसर से लेकर मुख्य गेट (गेट नंबर एक) तक पैदल मार्च निकाला और वहीं मुख्य द्वार के सामने बैठकर जमकर नारेबाजी की।

सरकार विरोधी नारों से गूंजा कैंपस
गेट पर धरना दे रहे छात्रों का गुस्सा साफ नजर आ रहा था। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने ‘जो सरकार निकम्मी है-वह सरकार बदलनी है’ और ‘छात्र विरोधी यह सरकार नहीं चलेगी’ जैसे तीखे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप था कि मौजूदा भाजपा सरकार न तो युवाओं के भविष्य की रक्षा कर पा रही है और न ही प्रदेश में अपराध नियंत्रण पर कोई सख्त कदम उठा पा रही है।
पुलिस से नोकझोंक और हिरासत में भेजा ईको गार्डन
आक्रोशित छात्रों के उग्र रुख को देखते हुए विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर भारी संख्या में पुलिस बल और अधिकारी पहले से ही तैनात थे। सुरक्षा के लिहाज से गेट के ठीक सामने मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स से आगे बढ़ने लगे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। आखिरकार पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और बसों में लादकर ईको गार्डन भेज दिया।
’बेटी बचाओ का नारा खोखला, सीतापुर घटना पर मांगा न्याय’
छात्र सभा के पदाधिकारियों ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार के राज में बहन-बेटियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। उन्होंने सीतापुर की दुखद घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनकी एक बहन की हत्या के बाद उसके शव को फंदे से लटका दिया गया लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बहन-बेटियों को इंसाफ नहीं मिला तो वे इस सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेंगे।

’जीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर पूरी तरह विफल’
प्रदर्शन में शामिल लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कहा कि पारदर्शी परीक्षाएं आयोजित कराने में असमर्थ यह सरकार पूरी तरह छात्र-विरोधी साबित हो चुकी है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति कागजों तक सीमित है और जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आलोक यादव, अरमान, रविनंदन सहित कई छात्र नेताओं ने संकल्प दोहराया कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय और युवाओं को उनका हक नहीं मिल जाता तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।






