राजकिशोर तिवारी
रुद्रप्रयाग, 21 मई 2026:
पंच केदारों में शामिल द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट गुरुवार पूर्वाह्न 11:30 बजे श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। फूलों से सजे मंदिर में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान मध्यमहेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
कपाट खुलने से पहले पुजारी शिवशंकर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा संपन्न कराई। इस दौरान स्वयंभू शिवलिंग को समाधि स्वरूप से श्रृंगार स्वरूप में सजाया गया। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक भगवान मध्यमहेश्वर की चल विग्रह डोली को भंडार कक्ष तक लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि मध्यमहेश्वर यात्रा को लेकर इस बार व्यापक इंतजाम किए गए हैं। समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के मुताबिक 19 मई को चल विग्रह डोली ओंकारेश्वर मंदिर से पहले पड़ाव राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। इसके बाद 20 मई को डोली गौंडार गांव पहुंची और गुरुवार सुबह वहां से प्रस्थान कर मध्यमहेश्वर धाम पहुंची, जहां तय मुहूर्त में कपाट खोले गए।
मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने बताया कि कपाट खुलने के पहले दिन 1135 श्रद्धालु मध्यमहेश्वर मंदिर पहुंचे।
इस मौके पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया, डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार, गणेश सेमवाल, प्रकाश पंवार व वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।






