
लखनऊ/अमेठी, 1 सितंबर 2026:
महान सूफी संत एवं कवि मलिक मोहम्मद जायसी की साहित्यिक विरासत को अब नई पहचान मिलने जा रही है। यूपी के अमेठी स्थित मलिक मोहम्मद जायसी स्मारक एवं पार्क को प्रदेश सरकार सूफी-कबीर सर्किट के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। पर्यटन विभाग की ओर से करीब 10.36 करोड़ रुपये की पर्यटन विकास परियोजना पर काम चल रहा है। परियोजना के लिए अब तक 9.15 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक पूरा प्रोजेक्ट अक्टूबर तक तैयार हो जाएगा।
सरकार की यह पहल सिर्फ पुराने स्मारक का कायाकल्प करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए जायसी के जीवन, साहित्य और उनकी कालजयी रचनाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अमेठी में जन्मे जायसी प्रदेश की सूफी और साहित्यिक परंपरा के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनके जन्मस्थल पर मौजूद शोध संस्थान और स्मारक को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक केंद्र बनाया जा रहा है।
पार्क को मिलेगा ‘अमृत उद्यान’ जैसा स्वरूप
परियोजना के तहत मलिक मोहम्मद जायसी पार्क का बड़े स्तर पर लैंडस्केप विकास किया जा रहा है। पार्क को लैंडस्केप सममित डिजाइन के साथ व्यवस्थित और आकर्षक रूप दिया जा रहा है। यहां दो सामुदायिक पार्क, ओपन जिम, वॉकिंग और मेडिटेशन जोन, एक्यूप्रेशर शैली का कंकड़ मार्ग, पार्किंग, भव्य प्रवेश द्वार और बच्चों के लिए प्ले एरिया विकसित किए जा रहे हैं।
मौजूदा शोध संस्थान को आधुनिक लाइब्रेरी में बदला जा रहा है। यह केंद्र जायसी के जीवन और साहित्य को समझने के लिए विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए खास महत्व रखेगा। इसके साथ करीब 120 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी तैयार किया जा रहा है, जहां सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लाइट एंड साउंड शो आयोजित किए जा सकेंगे।
दीवारों पर दिखेगी जायसी की साहित्यिक यात्रा
लाल बलुआ पत्थर से बने स्मारक को भी नए तरीके से संवारा जा रहा है। इसकी दीवारों पर जायसी के जीवन, साहित्यिक यात्रा और उनकी कालजयी रचनाओं को दर्शाने वाले कलात्मक भित्तिचित्र तैयार किए जा रहे हैं। यानी यहां आने वाले पर्यटकों को सिर्फ एक स्मारक देखने का अनुभव नहीं होगा, बल्कि वे जायसी के जीवन और साहित्य से भी रूबरू हो सकेंगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उन संतों और कवियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि जायसी परियोजना उनकी अमर साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के साथ सूफी-कबीर सर्किट को मजबूती देगी और युवा पीढ़ी को समृद्ध साहित्यिक परंपरा से जोड़ेगी।
मंत्री के मुताबिक मलिक मोहम्मद जायसी की 16वीं शताब्दी की कालजयी रचना ‘पद्मावत’ भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल है। इसके बावजूद जायसी शोध संस्थान और उनकी विरासत की लंबे समय तक अपेक्षित देखभाल नहीं हो सकी। कभी अस्तबल के रूप में इस्तेमाल होने की स्थिति तक पहुंचे इस परिसर को अब आधुनिक पर्यटन केंद्र में बदला जा रहा है।

सरकार की नजर में यह परियोजना सिर्फ एक स्मारक का पुनर्विकास नहीं अपितु साहित्य, संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक सौहार्द को एक मंच पर लाने की कोशिश है। अक्टूबर में परियोजना पूरी होने के बाद अमेठी का यह स्थल जायसी की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ सूफी-कबीर सर्किट के एक अहम पड़ाव के रूप में सामने आ सकता है।






