लखनऊ, 8 अगस्त 2026:
सपा मुखिया अखिलेश यादव की ओर से पीडीए की नई व्याख्या किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में जातीय समीकरणों को लेकर बहस तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने पीडीए में ‘P’ का मतलब पिछड़ा के साथ-साथ ‘पंडित’ और ‘पीड़ित’ भी बताया है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस पर तीखा हमला बोला है।
मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सपा की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति और सिद्धांत पर चलने वाली सर्वसमाज-हितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है। यूपी में चार बार बसपा की सरकार भी इसी नीति के आधार पर चली।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए ‘गिरगिट की तरह रंग बदलती’ रहती है। उन्होंने कहा कि सपा द्वारा प्रचारित पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अक्लियत में पहले ‘पी’ का अर्थ पिछड़ा बताया गया था लेकिन अब अपरकास्ट समाज, खासकर ब्राह्मण समाज के बसपा से तेजी से जुड़ने और इसी आधार पर पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने से सपा विचलित नजर आ रही है।
बसपा सुप्रीमो ने तंज कसते हुए कहा कि इसी क्रम में सपा ने अब ‘पी’ से ‘पंडित’ कर दिया है। उनके मुताबिक यह सपा के राजनीतिक छल और छलावे का एक और उदाहरण है। मायावती ने कहा कि ऐसी राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष को कुछ समय के लिए राजनीतिक लाभ मिल सकता है लेकिन इससे पूरे समाज का भला नहीं हो सकता।
उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से सपा और उसकी कथित संकीर्ण जातिवादी राजनीति से सावधान रहने की अपील की। उनका कहना है कि यह समय की मांग और सर्वसमाज के हित में भी जरूरी है।






