
लखनऊ, 21 जुलाई 2026:
उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अब भारतीय ज्ञान परंपरा पर संगठित तरीके से रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। योगी सरकार की कैबिनेट ने राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही योजना को लागू करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी स्वीकृत कर दिए गए हैं। सरकार का मकसद भारतीय ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को उच्च शिक्षा से जोड़ना है ताकि नई पीढ़ी इन विषयों पर गहराई से अध्ययन और शोध कर सके।
इन संस्थानों में बनेगी शोधपीठ
योजना के तहत ऐसे राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालय चुने जाएंगे, जो कम से कम 50 साल पुराने हों और जहां 5 हजार या उससे ज्यादा छात्र पढ़ते हों। इन संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा के महान आचार्यों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और चिंतकों के नाम पर Research Chair यानी शोधपीठ स्थापित की जाएगी। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 5 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
रिसर्च के साथ होगा दस्तावेजीकरण
इन शोधपीठों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर रिसर्च, दस्तावेज तैयार करने और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार का काम होगा। सरकार चाहती है कि छात्र और शोधार्थी भारतीय ज्ञान-विज्ञान को आधुनिक नजरिए से समझें। इसके साथ ही उनमें वैज्ञानिक सोच, तार्किक दृष्टि और वैश्विक स्तर पर इसकी उपयोगिता को लेकर बेहतर समझ विकसित हो।

पांच साल तक मिलेगा आर्थिक सहयोग
लोक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली को मजबूत करने पर खास जोर देती है। इसी सोच के तहत पारंपरिक चिकित्सा, पर्यावरण, कृषि परंपराओं, सांस्कृतिक अध्ययन और भारतीय ज्ञान की दूसरी विधाओं पर वैज्ञानिक तरीके से रिसर्च कराई जाएगी, ताकि उसका फायदा समाज तक पहुंच सके। हर शोधपीठ सामान्य तौर पर पांच साल के लिए स्थापित की जाएगी। इस अवधि के बाद उसके कामकाज की समीक्षा होगी और जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाने का फैसला लिया जाएगा।
दो करोड़ रुपये तक का अनुदान, CSR से भी मिलेगी मदद
सरकार प्रत्येक शोधपीठ के लिए अधिकतम दो करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान देगी। यह राशि सावधि जमा खाते में रखी जाएगी और उससे मिलने वाले ब्याज से शोधपीठ का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा CSR फंड, दान और दूसरे स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक मदद भी इसी खाते में जमा की जा सकेगी।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा पर Research को नया आधार मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय ज्ञान-विज्ञान को अंतरराष्ट्रीय Academic मंचों तक पहुंचाने की दिशा में भी यह पहल अहम मानी जा रही है।






