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मुकुट की तरह चमकेगा मेरठ… 800 करोड़ के ज्वेलरी पार्क से मिलेगी वैश्विक पहचान

सराफा कारोबार को मिलेगी वैश्विक पहचान, झुमके जैसे प्रवेश द्वार और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा पार्क, वेदव्यासपुरी में 36 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होगा आधुनिक ज्वेलरी हब

लखनऊ/मेरठ, 17 जून 2026:

यूपी सरकार ने मेरठ के पारंपरिक सराफा कारोबार को नई उड़ान देने के लिए 800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ज्वेलरी पार्क विकसित करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) द्वारा कराया जाएगा। बुधवार को पीएल शर्मा मैदान के निकट स्थित एक सभागार में एमडीए अधिकारियों ने ज्वेलरी पार्क का मॉडल और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट स्थानीय कारोबारियों के सामने प्रस्तुत की।

मेरठ के वेदव्यासपुरी क्षेत्र में लगभग 36 हजार वर्गमीटर भूमि पर बनने वाला यह ज्वेलरी पार्क अपनी अनूठी वास्तुकला के कारण भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। पार्क की पूरी संरचना मुकुट (क्राउन) के आकार में तैयार की जाएगी। इसका मुख्य प्रवेश द्वार झुमके की आकृति पर आधारित होगा। यह डिजाइन मेरठ की आभूषण कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनेगी।

पार्क में आभूषण उद्योग से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां भव्य शोरूम, थोक व्यापार केंद्र, कारीगरों के लिए कार्यशालाएं, उत्पादन इकाइयां, प्रदर्शनी स्थल, बैंकिंग सुविधाएं तथा साझा सेवा केंद्र विकसित किए जाएंगे। सरकार की योजना है कि ज्वेलरी कारोबार से संबंधित संपूर्ण गतिविधियां एक ही स्थान से संचालित हों, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिल सके।

परियोजना के तहत मुख्य प्रवेश द्वार के साथ विभिन्न व्यापारिक खंडों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था भी की जाएगी। पार्क में अत्याधुनिक सुरक्षा प्रबंधों के अलावा खरीदारों और विक्रेताओं के ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले व्यापारियों को बेहतर कारोबारी वातावरण मिलेगा।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने परियोजना की संरचना, भूखंड आवंटन प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाओं, प्रस्तावित दरों और संभावित व्यापारिक अवसरों की विस्तार से जानकारी दी। कारोबारियों ने भी विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि ज्वेलरी पार्क के निर्माण से मेरठ का आभूषण उद्योग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान हासिल करेगा। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। फिलहाल कारोबारियों की निगाहें भूखंड आवंटन प्रक्रिया और प्रस्तावित दरों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।

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