
स्पोर्ट्स डेस्क, 7 जुलाई 2026:
FIFA World Cup से ब्राजील की विदाई के साथ ही फुटबॉल जगत के सबसे चमकदार सितारों में शामिल उसके 34 वर्षीय सांबा स्टाइल स्टार जादूगर नेयमार डा सिल्वा सैंटोस या नेमार जूनियर का अंतरराष्ट्रीय करियर भी इतिहास बन गया। नॉर्वे के हाथों राउंड ऑफ-16 में मिली हार के बाद नेमार ने भावुक अंदाज में राष्ट्रीय टीम को अलविदा कह दिया। खास बात यह रही कि अपने आखिरी मैच में भी उन्होंने इंजरी टाइम में पेनल्टी के जरिए ब्राजील का एकमात्र गोल दागा लेकिन वह टीम को हार से नहीं बचा सके।
‘मैंने कोशिश की… बहुत कोशिश की…’
मैच समाप्त होने के बाद नम आंखों से दर्शकों का अभिवादन करते हुए नेमार ने कहा- मैंने कोशिश की… बहुत कोशिश की, लेकिन अब सब खत्म हो गया। मैंने यहीं से शुरुआत की थी और यहीं मेरा सफर समाप्त हुआ। उनके ये शब्द करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों को भावुक कर गए।

महान पेले का रिकॉर्ड तोड़कर ब्राजील के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर बने
नेमार ने 2010 में न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में अमेरिका के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। संयोग देखिए कि 2026 विश्व कप में इसी स्टेडियम पर उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला भी खेला। 16 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने 130 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 80 गोल दागे और 2023 में महान पेले (77 गोल) का रिकॉर्ड तोड़कर ब्राजील के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर बने।
ब्राजील को जिताया ओलंपिक स्वर्ण पदक
नेमार चार अलग-अलग विश्व कप में गोल करने वाले पेले के बाद दूसरे ब्राजीली खिलाड़ी बने। हालांकि, व्यक्तिगत उपलब्धियों से भरे इस करियर में विश्व कप ट्रॉफी का सपना अधूरा ही रह गया। उन्होंने ब्राजील को ओलंपिक स्वर्ण पदक और फीफा कन्फेडरेशन कप जरूर जिताया लेकिन बैलन डी’ओर और विश्व कप उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी ख्वाहिश बनकर रह गए।
करियर में 48 बड़ी चोटों का करना पड़ा सामना
नेमार का करियर जितना शानदार रहा उतना ही चोटों से भी प्रभावित रहा। 2014 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के खिलाफ कमर में फ्रैक्चर ने उनके करियर की दिशा बदल दी। वह जर्मनी के खिलाफ ऐतिहासिक सेमीफाइनल और तीसरे स्थान के मुकाबले में नहीं खेल सके, जहां ब्राजील को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।पूरे करियर में उन्हें 48 बड़ी चोटों का सामना करना पड़ा और वह 1500 से अधिक दिन मैदान से दूर रहे।

आखिरी सीटी तक कायम रहा नेमार का जादू
2026 विश्व कप में भी दाएं पैर की चोट के कारण नेमार केवल स्कॉटलैंड और नॉर्वे के खिलाफ बतौर सब्स्टीट्यूट ही मैदान पर उतर सके। इसके बावजूद उन्होंने आखिरी मुकाबले में गोल कर यह साबित किया कि उनका जादू आखिरी सीटी तक कायम रहा।
नेमार का अंतरराष्ट्रीय सफर भले ही विश्व कप ट्रॉफी के बिना समाप्त हुआ हो लेकिन उनकी कला, सांबा शैली, ड्रिब्लिंग और आक्रामक खेल ने उन्हें फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार खिलाड़ियों में हमेशा शामिल रखा जाएगा। उनका आखिरी गोल सिर्फ स्कोरबोर्ड पर दर्ज एक अंक नहीं बल्कि एक महान करियर पर लगा भावनात्मक हस्ताक्षर बन गया।






