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‘राजा बाबू’ पर राजभर का वार : अखिलेश के लिए नायक होने की पहली शर्त यादव होना, कुर्मी नेताओं की उपेक्षा का आरोप

डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि न देने को बनाया मुद्दा, बोले- 'यादववादी राजनीति' में गैर-यादव ओबीसी और दलित नायकों के लिए सम्मान नहीं

लखनऊ, 5 जुलाई 2026:

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने अपना दल के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि न देने के मुद्दे को लेकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए लंबे पोस्ट में राजभर ने अखिलेश को ‘राजा बाबू’ कहकर संबोधित करते हुए उन पर कुर्मी समाज और गैर-यादव पिछड़े वर्ग के नेताओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

राजभर ने लिखा कि 2 जुलाई को सामाजिक न्याय के प्रखर नेता और पिछड़े, वंचित तथा शोषित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती थी लेकिन अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पर उनके सम्मान में एक शब्द तक नहीं लिखा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अखिलेश यादव के लिए नायक होने की पहली शर्त यादव होना है। कुर्मी, गैर-यादव ओबीसी और दलित समाज के महापुरुषों के प्रति उनकी कोई संवेदना या सम्मान नहीं है।

सुभासपा प्रमुख ने यह भी कहा कि डॉ. सोनेलाल पटेल की बेटी ने एक जुलाई को अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं लेकिन उसके अगले ही दिन उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि तक नहीं दी गई। उन्होंने इसे राजनीतिक शुचिता और मर्यादा के विपरीत बताते हुए कहा कि अखिलेश को कम से कम अपने पिता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की परंपरा का पालन करना चाहिए था जो डॉ. सोनेलाल पटेल का सम्मान करते थे।

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राजभर ने यह भी याद दिलाया कि डॉ. सोनेलाल पटेल की पत्नी और एक बेटी समाजवादी पार्टी के साथ हैं। पार्टी की विधायक भी हैं। इसके बावजूद अखिलेश की ओर से श्रद्धांजलि न दिया जाना पूरे कुर्मी समाज का अपमान है। उन्होंने दावा किया कि कुर्मी समाज इसे केवल जातिगत भेदभाव के नजरिए से देख रहा है।

अपने हमले को और धार देते हुए राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी यादववादी राजनीति करती है, जहां गैर-यादव ओबीसी नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय बाबू बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी इसी वजह से पार्टी छोड़नी पड़ी थी। अंत में राजभर ने कुर्मी समाज से समाजवादी पार्टी की सच्चाई पहचानने की अपील करते हुए कहा कि बहुजन समाज के स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई वह आगे भी लड़ते रहेंगे।

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