लखनऊ, 9 जून 2026:
यूपी ने अपनी हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्रदेश के 71 जिलों से अब तक 12 लाख 20 हजार 432 से अधिक पांडुलिपियों का विवरण ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। धार्मिक, दार्शनिक, साहित्यिक और ऐतिहासिक महत्व की इन अमूल्य धरोहरों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने का अभियान उत्तर प्रदेश को देश में पांडुलिपि संरक्षण के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ले आया है।
प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को बताया कि वाराणसी 3 लाख 12 हजार 724 पांडुलिपियों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। यहां अध्यात्म, दर्शन, आयुर्वेद, धर्मशास्त्र, वेद, ज्योतिष, तंत्र, कृषि और भगवान बुद्ध से संबंधित बर्मी लिपि में लिखे दुर्लभ ग्रंथों का विशाल संग्रह दर्ज किया गया है। संस्कृत भाषा में लिखी ऋग्वेद संहिता, ऐतरेय ब्राह्मण, ऐतरेय आरण्यक भाष्य, रुद्री, शांति मंत्र, पवमान सूक्त और शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ी पांडुलिपियां विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
पांडुलिपियों के संरक्षण की इस दौड़ में अयोध्या 2 लाख 44 हजार 644 और रामपुर 2 लाख 32 हजार 735 पांडुलिपियों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। प्रयागराज, सिद्धार्थनगर, सहारनपुर, मथुरा और लखनऊ सहित कई जिलों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। बलिया, इटावा, सीतापुर, गोरखपुर, मऊ, आगरा और फर्रुखाबाद जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में पांडुलिपियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज की गई है।

ज्ञान भारतम् मिशन के दौरान कई दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियां भी सामने आई हैं। इनमें वर्ष 1640 ईस्वी की हरिवंश पुराण पांडुलिपि विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिसे महाभारत का अठारहवां और अंतिम पर्व माना जाता है। वहीं 1867 ईस्वी की अत्यंत लघु आकार वाली श्रीमद्भगवद्गीता पांडुलिपि भी शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का विषय बनी हुई है। इसमें गीता के सभी 700 श्लोक चित्रों सहित अंकित हैं।
लगभग 250 वर्ष पुरानी श्रीमद्भगवद्गीता एवं विविध स्तोत्र पांडुलिपि, 1840 की विष्णु पुराण तथा ताड़पत्र पर लिखित लगभग 200 वर्ष पुरानी पुरुषोत्तम माहात्म्य जैसी धरोहरें भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को दर्शाती हैं। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, पहचान, संरक्षण और डिजिटलीकरण करना है।
इसके तहत संस्थागत और निजी संग्रहों में सुरक्षित ग्रंथों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ उनके अध्ययन, अनुवाद, अनुसंधान और प्रकाशन पर भी कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के सहारे उत्तर प्रदेश अपनी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने के साथ उसे नई पीढ़ी और दुनिया भर के शोधार्थियों तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।






