
न्यूज डेस्क, 21 जुलाई 2026:
देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक संग्राम में बदल गया है। युवाओं के आंदोलन के 32वें दिन मंगलवार को कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के निकट लोक कल्याण मार्ग पर धरना देकर सरकार पर तीखा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता धरने में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। चूंकि लोक कल्याण मार्ग हाई सिक्योरिटी जोन है और यहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं होती इसलिए पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया।

इस पर कांग्रेस नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से अपने हाथ बांध लिए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने इस प्रदर्शन की तैयारी बेहद गोपनीय तरीके से की थी जिससे पुलिस और प्रशासन को पहले से इसकी भनक नहीं लग सकी। अचानक हुए इस प्रदर्शन ने सुरक्षा एजेंसियों की भी हलचल बढ़ा दी।
धरने से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल पहुंचकर पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने घायलों का हालचाल जाना और अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती एक घायल छात्रा की मां से भी मुलाकात की। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। राहुल ने बताया कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की मांग भी की है।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं और सवाल किया कि क्या यही सबका साथ, सबका विकास है। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में उतरीं। आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल के भी प्रदर्शन स्थल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।






