
लखनऊ, 30 जून 2026:
रामनगरी अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा। इसने यूपी के साथ राष्ट्रीय राजनीति को भी गरमा दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच बसपा सुप्रीमो एवं प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने इस पूरे प्रकरण को अति-गंभीर और चिंतनीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, वहीं मामले के राजनीतिकरण से बचने की भी नसीहत दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार को किए गए अपने पोस्ट में मायावती ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी, गबन और हेराफेरी जैसी खबरें बेहद गंभीर हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण उचित नहीं है।

मायावती ने सुझाव दिया कि देश के अन्य प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे के लेखा-जोखा की जो पारदर्शी व्यवस्था लागू है, उसी प्रकार की व्यवस्था अयोध्या में भी अपनाई जाए जिससे भविष्य में ऐसी शिकायतों की गुंजाइश न रहे।उन्होंने राजनीति के अपराधीकरण, अपराध के राजनीतिकरण, धर्म के राजनीतिकरण और राजनीति के अंध-धर्मीकरण से बचने की भी अपील की।
उधर, विपक्षी दल इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट को लगातार घेर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के संरक्षण में नियमों का उल्लंघन हुआ। उसने ट्रस्ट से राजनीतिक व्यक्तियों को हटाकर साधु-संतों को शामिल करने की भी बात कही है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस मुद्दे को सबसे पहले उठाने वाले प्रमुख नेताओं में रहे हैं। सपा का आरोप है कि जो लोग भगवान राम के नाम पर राजनीति करते हैं वही अब मंदिर के चढ़ावे पर डाका डाल रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने गत दिनों लखनऊ में एसआईटी प्रमुख एवं मंडलायुक्त के समक्ष पेश होकर कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सौंपने का दावा किया है।
हालांकि भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जो दल कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व और मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, वही अब राजनीतिक लाभ के लिए रामभक्ति का दिखावा कर रहे हैं। ऐसे में राम मंदिर का यह विवाद अब जांच के साथ-साथ प्रदेश और देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।






