विकास गोंड
वाराणसी, 1 मई 2026:
कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती ने कहा कि आज के दौर में धर्म का प्रचार जरूरी हो गया है, क्योंकि युवा पीढ़ी इसे विकास और आधुनिकता से जोड़कर नहीं देख पा रही है। उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीय युवाओं के नजरिए पर भी चिंता जताई।
शंकराचार्य अस्सी क्षेत्र स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। विधि विधान के साथ जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत कर उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने धर्म को समझने का क्रम साफ किया। कहा कि सबसे पहले अध्ययन जरूरी है, जिससे व्यक्ति मूल बातों को समझ सके। इसके बाद बोध आता है, यानी धर्म क्या सिखाता है यह समझ बनती है। तीसरे चरण में आचरण होता है, जब व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में उतारता है। अंत में सरल और सकारात्मक तरीके से प्रचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यह क्रम उलट गया है। लोग पहले प्रचार और प्रदर्शन पर जोर देते हैं, जबकि समझ और व्यवहार पीछे छूट जाता है। तकनीक और डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन उसमें दिखावे से बचना चाहिए।
शंकराचार्य ने काशी की धार्मिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों का पुनर्विकास सिर्फ ढांचा सुधारने का काम नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था को सहेजने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह, सचिव शैलेष त्रिपाठी, श्रीकांची कामकोटि मठ के प्रबंधक बी एस सुब्रह्मण्यम मणि समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा माहौल भक्तिमय रहा।






