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Share Market की चाल थमी, कच्चा तेल 100 डॉलर पार, ऑटो-कंज्यूमर सेक्टर दबाव में

निफ्टी 23,500 के अहम स्तर से नीचे, मिडकैप में कमजोरी तो स्मॉलकैप में मामूली तेजी, अमेरिकी बाजारों में गिरावट, 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.83 फीसदी पहुंची, महंगा कच्चा तेल लंबे समय तक रहा तो GDP ग्रोथ व कंपनियों की कमाई पर असर की आशंका

बिजनेस डेस्क, 10 सितंबर 2026:

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को शुरुआती कारोबार में करीब सपाट रहा। सुबह 9:23 बजे सेंसेक्स 36 अंक यानी 0.05 फीसदी गिरकर 74,727.96 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी भी 8.25 अंक यानी 0.01 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 23,430 पर था। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में दिखा।

ऑटो शेयर सबसे ज्यादा दबाव में

शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो व निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप लूजर्स में रहे। इनके अलावा निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इन्फ्रा व निफ्टी मेटल भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

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इन सेक्टरों में खरीदारी का रुख

दूसरी तरफ निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक व निफ्टी एफएमसीजी में तेजी दिखी। मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 114 अंक यानी 0.18 फीसदी गिरकर 62,479 पर था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 18 अंक की मामूली बढ़त के साथ 20,055 पर पहुंचा।

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ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत

भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों से भी मजबूत सपोर्ट नहीं मिला। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल व जकार्ता के प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डॉव जोन्स 0.77 फीसदी गिरा, जबकि नैस्डैक में 0.64 फीसदी की कमजोरी रही।

23,500 के नीचे निफ्टी पर नजर

बाजार जानकारों के मुताबिक निफ्टी का 23,500 के रेजिस्टेंस लेवल से नीचे आना बाजार के लिए कमजोर संकेत है। तकनीकी स्तर पर आगे भी गिरावट का जोखिम बना हुआ है। इसी बीच मैक्रो स्तर पर भी कुछ ऐसे संकेत सामने आए हैं, जिनसे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

100 डॉलर पार कच्चा तेल बढ़ा सकता है दबाव

ब्रेंट क्रूड की कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी बढ़कर 4.83 फीसदी हो गई है। जानकारों का कहना है कि इन परिस्थितियों से ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी है। महंगे कच्चे तेल का असर खास तौर पर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

GDP ग्रोथ पर भी असर की आशंका

जानकारों के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है, चालू खाता घाटा भी फिलहाल नियंत्रण में है। इसके बावजूद अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो इस साल भारत की GDP growth पर दबाव पड़ सकता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनकी कमाई पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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