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पोलियो ने ताकत छीनी, पति ने भी दुत्कारा, अब CWG में गोल्ड जीतकर शर्मीला ने रचा इतिहास, जानें हिम्मत भरी कहानी

40 की उम्र में थकने की जगह हरियाणा रेवाड़ी की शर्मीला धनकड़ ने कायम की मिसाल, बचपन में पोलियो का शिकार हुईं,19 साल में हुई शादी के बाद झेला पति की हिंसा का दर्द, 2012 में बेटियों के साथ घर से निकाली गईं, दूसरे पति अजीत सिंह ने दिया मजबूत सहारा फिर कर दिखाया चमत्कार

स्पोर्ट्स डेस्क, 29 जुलाई 2026:

हरियाणा रेवाड़ी की शर्मीला धनकड़ ने 40 साल की उम्र में वह कर दिखाया, जिसकी शायद कभी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। Commonwealth Games 2026 में भारत की पैरा एथलीट ने गोला फेंक F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीत लिया। इस जीत के साथ शर्मीला Commonwealth Games में पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए गोल्ड जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। उनके इस प्रदर्शन ने भारत के पैरा एथलेटिक्स अभियान को भी नई पहचान दी।

14 साल पहले जिंदगी में आया था सबसे मुश्किल दौर

आज जिस शर्मीला धनकड़ का नाम Commonwealth Games के गोल्ड मेडल के साथ लिया जा रहा है, उनकी जिंदगी करीब 14 साल पहले बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थी। शर्मीला ने बताया कि 2012 में उनके पहले पति ने उन्हें दो बेटियों के साथ घर से निकाल दिया था। रेवाड़ी के गुरकावास गांव में उन्हें निर्वस्त्र हालत में सड़क पर छोड़ दिया गया था। पड़ोसियों ने उन्हें कंबल और रजाई से ढका। इसके बाद उनके माता-पिता उन्हें अपने गांव छिथरौली ले गए।

19 साल की उम्र में हुई शादी, नशे की लत ने बिगाड़े हालात

शर्मीला की शादी सिर्फ 19 साल की उम्र में हो गई थी। उन्होंने बताया कि उनके पहले पति को नशे की लत थी। दूसरी बेटी के जन्म के बाद घर के हालात और खराब हो गए। पति की प्रताड़ना बढ़ती गई और एक वक्त ऐसा आया जब शर्मीला को दोनों बेटियों के साथ घर से निकाल दिया गया। उस समय उनकी जिंदगी में आगे क्या होगा, इसका कोई भरोसा नहीं था।

दो साल की उम्र में पोलियो ने पैर को किया कमजोर

शर्मीला की जिंदगी में संघर्ष बचपन से ही शुरू हो गया था। जब वह सिर्फ दो साल की थीं, तब उनके एक पैर में पोलियो हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में अपनी काबिलियत साबित की। उनकी मां सरोज के मुताबिक, शर्मीला कक्षा एक से दसवीं तक टॉपर रही थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई।

मां भी बचपन से नेत्रहीन, बेटी की कामयाबी पर छलका गर्व

शर्मीला की मां सरोज खुद बचपन से नेत्रहीन हैं। बेटी के Commonwealth Games में गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा कि यह शर्मीला के जज्बे और मेहनत का नतीजा है। उन्होंने बताया कि जब 2012 में शर्मीला के साथ वह घटना हुई थी, तब उन्होंने अपने पति से बेटी को वापस घर लाने के लिए कहा था। इसके बाद शर्मीला अपनी दोनों बेटियों के साथ मायके आ गईं।

पहली शादी टूटी तो अजीत ने थामा हाथ

पहले पति से तलाक के बाद शर्मीला की जिंदगी में अजीत सिंह आए। दोनों ने 2018 में शादी की। अजीत प्लंबर और पंप टेक्नीशियन के तौर पर काम करते थे। शर्मीला के मुताबिक, अजीत ने उनके जीवन को संभालने के साथ खेल में आगे बढ़ने के लिए भी पूरा साथ दिया। उन्होंने बेटियों की जिम्मेदारी उठाई, शर्मीला के अभ्यास और खेल की जरूरतों को समझा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अपना काम तक छोड़ दिया।
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परिवार की जिम्मेदारी के बीच बस कंडक्टर की नौकरी

शर्मीला ने परिवार चलाने के लिए नौकरी भी की। 2018 में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान उन्हें तीन महीने के अनुबंध पर महिला बस कंडक्टर के तौर पर काम मिला। एक तरफ परिवार की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ खेल में आगे बढ़ने की कोशिश। इसी बीच उन्होंने अभ्यास जारी रखा और धीरे-धीरे पैरा एथलेटिक्स में अपनी जगह मजबूत की।

बर्मिंघम और हांगझोउ में चौथे स्थान पर रहीं

शर्मीला इससे पहले बर्मिंघम पैरा Commonwealth Games और हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं। दोनों प्रतियोगिताओं में उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था। इस बार ग्लासगो में उन्होंने 9.81 मीटर का थ्रो किया और सीधे गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया। यह उनके करियर का सबसे बड़ा पदक है।

पिता के निधन के एक साल बाद मिली सबसे बड़ी खुशी

Commonwealth Games 2026 से करीब एक साल पहले शर्मीला के पिता का निधन हो गया था। जिस पिता ने मुश्किल समय में बेटी को अपने घर में सहारा दिया था, उनकी गैरमौजूदगी में शर्मीला ने ग्लासगो में देश के लिए गोल्ड जीत लिया। उन्होंने अपनी मां और दूसरे पति अजीत सिंह के साथ इस कामयाबी को सेलिब्रेट किया।

गोल्ड जीतकर महिलाओं को दिया खास संदेश

गोल्ड मेडल जीतने के बाद शर्मीला ने महिलाओं और बेटियों से घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उनका कहना है कि किसी भी महिला को प्रताड़ना सहकर चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ना चाहिए और अपनी आवाज उठानी चाहिए। शर्मीला अपनी बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहती हैं।

अब रेवाड़ी में किराए के घर से अपने घर का सपना

शर्मीला फिलहाल रेवाड़ी में किराए के मकान में रहती हैं। Commonwealth Games में गोल्ड जीतने के बाद उन्हें उम्मीद है कि Sports Authority of India और हरियाणा सरकार के सहयोग से वह अपना घर खरीद सकेंगी। उनके लिए यह सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उन तमाम मुश्किलों के बीच मिली बड़ी कामयाबी है, जिनसे वह पिछले कई साल से लड़ती रही हैं।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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