लखनऊ, 24 मई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के नगर निगम के एक घटनाक्रम ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। हाईकोर्ट द्वारा महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से उपविजेता रहे समाजवादी पार्टी के ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। रविवार सुबह करीब नौ बजे महापौर ने उन्हें शपथ दिलाई।
यह पूरा मामला भाजपा के पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को लेकर शुरू हुआ था। चुनाव में करीब 1700 मतों से हारने वाले सपा प्रत्याशी ललित तिवारी ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि प्रदीप शुक्ला ने अपने शपथ पत्र में विवाह संबंधी गलत जानकारी दी और आवश्यक तथ्यों को छिपाया। मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला जज की अदालत ने इसे कदाचार मानते हुए प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन निरस्त कर दिया और ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया।

अदालत के आदेश के बावजूद महीनों तक शपथ ग्रहण नहीं कराया गया। ललित तिवारी ने नगर निगम के साथ प्रशासनिक अफसरों और शासन स्तर तक पत्राचार किया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने शपथ ग्रहण कराने के निर्देश दिए लेकिन आदेश का पालन न होने पर 21 मई को महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए।
इसी बीच महापौर के अस्पताल में भर्ती होने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज रहीं। शनिवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद रविवार को उन्होंने शपथ ग्रहण कराया और कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया है।
घटना के बाद भाजपा और सपा के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा पार्षद अनुराग मिश्रा समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब रामपुर में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के मामले में दोबारा चुनाव कराया गया था तो यहां भी उपचुनाव होना चाहिए था। वहीं सपा इसे सत्य और न्याय की जीत बता रही है।






