Uttarakhand

श्रीलंका के अफसरों ने देखा उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल, लैंडस्लाइड कंट्रोल की समझी तकनीक

40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में पहुंचा, मौसम आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रयासों की ली जानकारी

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 17 अगस्त 2026ः

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन तंत्र और तकनीकी नवाचारों को जानने के लिए श्रीलंका के 40 सदस्यीय सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) की ओर से आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, मौसम आधारित जोखिम प्रबंधन और भूस्खलन नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

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यूएसडीएमए के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को केवल आपदा के बाद राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि जोखिम की पहचान, पूर्व चेतावनी, न्यूनीकरण, तैयारी, प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों और विभागीय समन्वय को एकीकृत करते हुए व्यापक तंत्र विकसित किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन और समुदाय की भागीदारी में रुचि दिखाई।

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश चंद्र ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियां आपदा जोखिमों को पहले से समझने और उनसे निपटने के लिए निरंतर तैयारी की मांग करती हैं। वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की सहभागिता आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), बहु-स्रोत चेतावनी तंत्र और तकनीक आधारित सूचना व निर्णय सहायता प्रणालियों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आपदा की सूचना प्राप्त होने से लेकर राहत एवं बचाव अभियान के संचालन तक विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां और समन्वय की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने मौसम आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपग्रह निगरानी, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र और वर्षामापी सहित आधुनिक उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों का लगातार विश्लेषण किया जाता है। रियल-टाइम आंकड़ों के आधार पर पूर्वानुमान और प्रभाव आधारित चेतावनियां जारी की जाती हैं, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक तैयारियां की जा सकें।

उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के जियोलॉजिस्ट डॉ. रघुवीर नेगी ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान, भू-वैज्ञानिक एवं भू-तकनीकी अध्ययन, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस विश्लेषण, ड्रोन सर्वेक्षण व ढलानों की निगरानी से संबंधित कार्यों की जानकारी दी। भूस्खलन और अत्यधिक बारिश से प्रभावित श्रीलंका के अधिकारियों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से अध्ययन का विषय रही। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी ली और अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन में निरंतर सीखने, अनुभव साझा करने और नई कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के अधिकारियों के साथ संवाद से आपदा जोखिमों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण विकसित होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रभावी व्यवस्थाओं को समझने और उत्तराखंड के अनुभव साझा करने से राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता और मजबूत होगी।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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