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सुस्त शुरुआत के साथ हरे निशान पर खुला शेयर बाजार…सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की बढ़त

ग्लोबल संकेतों से बाजार को सहारा, कच्चे तेल में गिरावट और विदेशी निवेश की वापसी से सेंटीमेंट मजबूत,मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा तेजी, रुपये में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती

बिजनेस डेस्क, 17 अप्रैल 2026:

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार की शुरुआत धीमी रही, लेकिन शुरुआती कारोबार में ही हल्की बढ़त के साथ दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बने रहे। बाजार को अंतरराष्ट्रीय संकेतों से सहारा मिला, जिससे निवेशकों का रुख सकारात्मक दिखा।

बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 177 अंक चढ़कर 78,166 के स्तर पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी भी 37 अंक की बढ़त के साथ 24,234 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 92.87 पर पहुंच गया। ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदों ने बाजार का माहौल संभाला। लेबनान-इजरायल के बीच जारी तनाव में राहत की खबरों का भी असर दिखा।

बाजार में इस बार बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों में ज्यादा तेजी रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 0.85 फीसदी और मिडकैप 100 में करीब 0.5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 50 में बढ़त सीमित रही।

सेक्टोरल मोर्चे पर एफएमसीजी और मीडिया शेयरों में एक फीसदी से ज्यादा उछाल देखा गया। दूसरी तरफ मेटल सेक्टर में हल्की गिरावट दर्ज हुई। प्रमुख शेयरों की बात करें तो आईटीसी, एनटीपीसी, ट्रेंट, मारुति, अदाणी पोर्ट्स, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और हिंदुस्तान यूनिलीवर में तेजी रही। वहीं बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और टाटा स्टील के शेयर दबाव में दिखे।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड 98 डॉलर के आसपास और डब्ल्यूटीआई 93 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा। इससे आयात लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद है, जिसका असर रुपये पर भी दिखा।

विदेशी निवेशकों की चाल भी बाजार के लिए अहम बनी हुई है। हाल की भारी बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक अब खरीदारी की तरफ लौटते नजर आए हैं। पिछले दो कारोबारी सत्र में उन्होंने बाजार में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। बाजार जानकारों के मुताबिक, छोटे और मझोले शेयरों में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। साथ ही चौथी तिमाही के नतीजों और कंपनियों के आउटलुक पर निवेशकों की नजर टिकी है।

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