Uttar Pradesh

गर्मी की छुट्टियों में सजा कला का मंच… संस्कृति विभाग की वर्कशॉप में अपना हुनर निखार रहे युवा

कार्यशालाओं में गायन, वादन, अभिनय, चित्रकला व लोककलाओं का दिया जा रहा प्रशिक्षण, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से लेकर राज्य संग्रहालय तक बच्चों और युवाओं को मिल रहा मौका मिल रहा है। संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बढ़ाया हौसला

लखनऊ, 12 जून 2026:

गर्मी की छुट्टियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए संस्कृति विभाग ने प्रदेशभर में सांस्कृतिक कार्यशालाओं का सिलसिला शुरू किया है। विभाग के विभिन्न संस्थानों में बच्चों, युवाओं और कला प्रेमियों को संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला, लोककला और हस्तशिल्प की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि भारतेन्दु नाट्य अकादमी में 6 जून से 5 जुलाई तक विशेष रंगमंच कार्यशाला चल रही है। इसमें प्रतिभागियों को अभिनय, मंच संचालन, संवाद अदायगी, अभिव्यक्ति और रंगमंच की तकनीकों का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नाट्य कला में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए यह कार्यशाला अपनी प्रतिभा को नई पहचान देने का मौका बन रही है।

उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय में 6 जून से 28 जून तक 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए हैप्पी आवर्स कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत कहानी-कथन, चित्रकला, हस्तशिल्प, ट्रेजर हंट समेत कई रचनात्मक गतिविधियां कराई जा रही हैं। इससे बच्चों को सीखने के साथ मनोरंजन का भी अवसर मिल रहा है।

Summer Art Workshop Youth Hone Creative Skills (1)

राज्य ललित कला अकादमी में 8 जून से 27 जून तक चित्रकला कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्रतिभागियों को चित्रांकन, रंगों के संयोजन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की अलग-अलग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कला में रुचि रखने वाले बच्चों और युवाओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है।

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में 26 मई से 25 जून तक चल रही कार्यशालाओं में गायन, वादन, नृत्य और ललित कला की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को कला की बारीकियों से परिचित कराया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की ओर से 21 मई से 31 जुलाई तक सृजन कार्यशाला श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसके तहत बिरहा, लोकनृत्य, कठपुतली कला, टेराकोटा, थारू चित्रकला समेत कई लोक और जनजातीय कला रूपों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जयवीर सिंह ने कहा कि इन कार्यशालाओं का मकसद सिर्फ प्रतिभाओं को मंच देना नहीं है, बल्कि प्रदेश की लोक और शास्त्रीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। विभाग की पहल से बड़ी संख्या में बच्चे और युवा सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ रहे हैं।

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