लखनऊ, 27 जून 2026:
राम मंदिर चढ़ावा घपले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अब प्रदेश में कानून राज की असली परीक्षा होने वाली है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा को विश्व हिंदू परिषद मुख्यालय से जारी निर्देश के बाद इस्तीफा देकर मुख्यालय बुला लिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल इस्तीफा दे देने से करोड़ों-अरबों रुपये के कथित चढ़ावा घोटाले, चोरी और हेराफेरी के आरोप खत्म हो जाएंगे या फिर कानून अपना काम करेगा।
उन्होंने कहा कि पूरे देश की नजर इस मामले पर है। अगर आरोप गंभीर हैं तो जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता। यह देखना होगा कि जांच की आंच उन लोगों तक भी पहुंचेगी जिन पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। यानी केवल प्यादे ही पिटते रहेंगे या बादशाह तक भी कानून के हाथ पहुंचेंगे।
मौर्य ने कहा कि अब यह उत्तर प्रदेश सरकार के कानून राज की सबसे बड़ी परीक्षा है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि कार्रवाई सिर्फ प्यादों तक सीमित रहेगी या फिर कानून के दायरे में बादशाह भी आएंगे। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।






