
न्यूज डेस्क, 26 जून 2026:
फोन बज रहा है और आप स्क्रीन की तरफ देखते तो हैं लेकिन कॉल उठाते नहीं। आप सोचते हैं कि थोड़ी देर बाद बात कर लूंगा। कुछ मिनट बाद वही नंबर दोबारा कॉल करता है और इस बार आप फोन को साइलेंट कर देते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो हो सकता है कि आप भी टेलीफोबिया की समस्या का सामना कर रहे हों जिसके बारे में लोग अब तेजी से बात करने लगे हैं।
ये एक ऐसी समस्या जिसमें इंसान घंटों चैट कर सकता है, सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रह सकता है, सैकड़ों मैसेज भेज सकता है लेकिन जैसे ही फोन की घंटी बजती है तो दिल की धड़कन तेज हो जाती है और मन में अजीब सी बेचैनी पैदा होने लगती है। ऐसे में लोगों को फोन कॉल करने या रिसीव करने से डर लगता है।
फोन कॉल से बढ़ रही युवाओं की दूरी
एक सर्वे के मुताबिक 18 से 34 साल के लगभग हर चार में से एक युवा अचानक आने वाली फोन कॉल उठाना ही पसंद नहीं करता। वहीं भारत में मेडिकल छात्रों पर हुए एक अध्ययन में करीब 42 प्रतिशत छात्रों में टेलीफोबिया के लक्षण पाए गए। यानी यह सिर्फ आपकी नहीं बल्कि डिजिटल पीढ़ी की एक नई चुनौती बनती जा रही है। कई लोगों के लिए फोन कॉल किसी परीक्षा से कम नहीं होती। उन्हें लगता है कि कहीं वे गलत न बोल दें, कहीं सामने वाला उन्हें जज न कर लें और कहीं वे सही जवाब न दे पाएं। धीरे-धीरे यही डर फोन से दूरी और कॉल से बचने की आदत में बदल जाता है।

डिजिटल कम्युनिकेशन ने बदल दी बातचीत
पहले घंटों फोन पर बातचीत होती थी और आज एक ‘ओके’ और इमोजी से बातचीत खत्म हो जाती है। मैसेज में हमें सोचने का समय मिलता है। हम शब्द बदल सकते हैं, गलतियां मिटा सकते हैं, लेकिन फोन कॉल में जवाब तुरंत देना पड़ता है और यही बात बहुत से लोगों को असहज बना देती है। हालांकि इस समस्या को अक्सर आज की पीढ़ी से जोड़कर देखा जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि टेलीफोबिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। कॉलेज का छात्र, ऑफिस में काम करने वाला कर्मचारी, व्यापारी या फिर गृहिणी कोई भी इस डर का सामना कर सकता है।
गलत बोलने और जज किए जाने का डर
कुछ लोगों को डर होता है कि वे गलत बोल देंगे, कुछ को लगता है कि लोग उनका मजाक उड़ाएंगे, कुछ लोग पहले किसी नकारात्मक अनुभव से गुजर चुके होते हैं और कुछ लोग इतने लंबे समय तक सिर्फ डिजिटल बातचीत करते रहते हैं कि वास्तविक बातचीत उन्हें मुश्किल लगने लगती है। यही वजह है कि फोन बजते ही घबराहट होना, दिल की धड़कन तेज हो जाना, कॉल को बार-बार नजरअंदाज करना और जरूरी बातों के लिए भी सिर्फ मैसेज का सहारा लेना आज आम होता जा रहा है।

आत्मविश्वास बढ़ेगा तो कॉल का डर भी घटेगा
कुछ उपायों को अपनाकर इस समस्या से बाहर निकला जा सकता है। इसकी शुरुआत बहुत छोटे कदमों से होती है। आज किसी दोस्त को दो मिनट के लिए फोन कीजिए, कल परिवार के किसी सदस्य से पांच मिनट बात कीजिए और जरूरी बातें पहले से लिख लीजिए। धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और एक दिन वही फोन कॉल जो जिससे कभी डर लगता था वो बिल्कुल सामान्य लगने लगेगी। इसलिए अगली बार जब आपका फोन बजे तो उसे सिर्फ एक रिंगटोन मत समझिए। हो सकता है कि उस कॉल के दूसरी तरफ कोई ऐसा इंसान हो जो सिर्फ आपकी आवाज सुनना चाहता हो।






