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UP में Homestays सेक्टर की ‘नई उड़ान’, अब 8 कमरे तक पंजीकरण और ऑटो रिन्यूअल का बड़ा तोहफा

पर्यटन नीति-2025 में बड़े बदलाव; बी एंड बी और होम स्टे के नियम हुए आसान, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार और पर्यटकों को बेहतर व किफायती ठहराव

लखनऊ, 22 जून 2026:

यूपी में तेजी से बढ़तीं पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन कर पर्यटन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बी एंड बी इकाइयों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बनाया गया है। साथ ही पहली बार पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्व-नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं का विस्तार करना है जिससे विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को बेहतर ठहराव मिल सके और स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हों।
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संशोधित नीति के अनुसार अब शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरे (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पहले अधिकतम छह कमरों तक ही किराये पर देने की अनुमति थी। इसके साथ ही यह अनिवार्य किया गया है कि होम स्टे केवल स्वामित्व वाली अथवा विकास प्राधिकरण से लीज पर प्राप्त भूमि पर बने आवासीय भवन में ही संचालित होगा और उसमें मालिक या उसका परिवार स्वयं निवास करेगा।

बी एंड बी श्रेणी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब आवासीय अथवा लीज पर लिए गए भवनों में अधिकतम आठ कमरों का पंजीकरण कराया जा सकेगा। इन इकाइयों में पर्यटकों को आवास के साथ नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही केयरटेकर का परिसर में निवास अनिवार्य होगा। यदि भवन लीज पर है तो उसकी अवधि कम से कम तीन वर्ष होना आवश्यक होगी।
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इसके अलावा 16 बेड वाली डॉरमेट्री को भी इस श्रेणी में पात्र माना गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों तथा होटल, मोटल और गेस्ट हाउस जैसी व्यावसायिक इकाइयों को इस योजना के तहत पंजीकरण की अनुमति नहीं मिलेगी।

नई नीति की सबसे बड़ी विशेषता पोर्टल आधारित ऑटो रिन्यूअल व्यवस्था है। अब संचालक अपने पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से तीन माह पहले विभागीय पोर्टल पर स्वयं ऑनलाइन नवीनीकरण करा सकेंगे, जिससे कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात ने कहा कि ये संशोधन प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमिता को नई गति देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास क्षमता बढ़ेगी और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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