लखनऊ, 11 मई 2026:
यूपी सरकार शिक्षा को केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय भारतीय संस्कृति, भाषाई विरासत और सामाजिक समावेश से जोड़ने की दिशा में बड़ा अभियान चला रही है।इस क्रम में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 13 से 19 मई तक भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से बच्चों को भारतीय भाषाओं, संवाद कौशल और इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।
यह शिविर बहुभाषावाद, सांस्कृतिक समरसता और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शासन ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए), खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिविर की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।
शिविर के दौरान छात्र-छात्राएं अपनी मातृभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के शब्द, अभिव्यक्ति और सामान्य संवाद शैली से परिचित होंगे। इसके अलावा पहली बार स्कूल स्तर पर इंडियन साइन लैंग्वेज को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है जिससे बच्चे सांकेतिक संवाद की मूल बातें सीख सकें और दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके।
योगी सरकार का मानना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता की मजबूत कड़ी है। इसी सोच के तहत यह अभियान बच्चों को भारतीयता और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। सरकार शिक्षा व्यवस्था को सामाजिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना से जोड़कर नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 के अनुरूप इस शिविर में समावेशी शिक्षा पर भी विशेष जोर रहेगा। एससीईआरटी की ओर से पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से इंडियन साइन लैंग्वेज से संबंधित शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिक्षक और छात्र दोनों इसे आसानी से सीख और समझ सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह शिविर केवल भाषा सीखने का कार्यक्रम नहीं बल्कि नई पीढ़ी में संवाद क्षमता, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने वाला व्यापक अभियान है। योगी सरकार का यह प्रयास आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भारतीय मूल्यों और सामाजिक समरसता से जोड़ने वाला बड़ा मॉडल साबित हो सकता है।






