
लखनऊ, 9 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के आसपास विकास का दायरा अब तेजी से फैलने वाला है। छह जिलों को जोड़कर तैयार किए जा रहे उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (यूपीएससीआर) ने अपना पहला बड़ा पड़ाव पार कर लिया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के सभागार में मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई रिव्यू कमेटी की बैठक में यूपीएससीआर के बेस मैप को मंजूरी दे दी गई। अब इसे एक्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष अंतिम अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद पूरे रीजन का रीजनल प्लान तैयार होगा।
यूपीएससीआर में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को शामिल किया गया है। करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस रीजन को जीआईएस आधारित क्षेत्रीय महायोजना के जरिए विकसित किया जा रहा है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक ट्रांसपोर्टेशन एंड मोबिलिटी, इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर और टूरिज्म को केंद्र में रखते हुए 30 प्रमुख परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं।
सड़क से रेल और मेट्रो तक बदलेगा कनेक्टिविटी नेटवर्क
यूपीएससीआर का सबसे बड़ा फोकस छह जिलों के बीच तेज और बेहतर कनेक्टिविटी पर है। इसके लिए राज्य राजधानी माला (रीजनल रोड), एलिवेटेड पेरिफेरल रोड और रोड अपग्रेडेशन जैसे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क विकसित करने की योजनाएं भी शामिल हैं। यानी भविष्य में लखनऊ से जुड़े इन जिलों के बीच आवागमन का नेटवर्क मौजूदा व्यवस्था से कहीं अधिक मजबूत और तेज बनाने की तैयारी है।
इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा नया कॉरिडोर
रीजन में केवल सड़क और परिवहन का विस्तार ही नहीं होगा अपितु आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने की योजना है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर ओरिएंटेड डेवलपमेंट जैसी परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनसे निवेश आकर्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।
22 संस्थाओं की सहमति के बाद बेस मैप को हरी झंडी
बेस मैप तैयार करने से पहले संबंधित विकास प्राधिकरणों, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग समेत 22 संस्थाओं से अभिमत लिया गया। सभी विभागों ने परीक्षण के बाद बेस मैप पर सहमति दी। मंगलवार की बैठक में इसका प्रेजेंटेशन किया गया, जिसके बाद कमेटी ने इसे मंजूरी दे दी।

2,239 स्थानों पर परखा गया सैटेलाइट डाटा
यूपीएससीआर के नक्शे को महज सैटेलाइट इमेज के आधार पर तैयार नहीं किया गया है। इसकी प्रमाणिकता जांचने के लिए सभी छह जिलों में ग्राउंड ट्रूथिंग कराई गई। कंसल्टेंट और संबंधित विभागों ने सैटेलाइट इमेज व नक्शों से मिले डाटा का मौके पर जाकर मिलान किया। इस दौरान 2,239 स्थानों पर स्थलीय सत्यापन किया गया। अब एक्जीक्यूटिव कमेटी की मंजूरी के बाद रीजनल प्लान तैयार होगा।
माना जा रहा है कि इसके जरिए लखनऊ-केंद्रित विकास को आसपास के जिलों तक विस्तार देने की जमीन तैयार होगी। निवेश, उद्योग, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचाने की योजना है। बेहतर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से लोगों को अपने ही क्षेत्र में रहने, काम करने और कारोबार करने के बेहतर विकल्प मिलेंगे और रोजगार के लिए होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।






