लखनऊ, 14 फरवरी,2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास की नई कार्यसंस्कृति स्थापित की है। अब फोकस केवल सड़क, बिजली और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव पूंजी को मजबूत करना भी प्राथमिकता में है। इसी सोच के तहत प्रदेश सरकार ने ‘टेक युवा समर्थ युवा’ योजना शुरू करने का निर्णय लिया है, जो युवाओं को भविष्य की तकनीकों में दक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
25 लाख युवाओं को हाईटेक प्रशिक्षण
इस योजना के तहत प्रदेश के 25 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा संसाधनों से ज्यादा कौशल पर आधारित है। इसलिए युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ना समय की जरूरत है।
डिजिटल अवसंरचना से डिजिटल दक्षता तक
सरकार पहले ही बड़ी संख्या में युवाओं को टैबलेट उपलब्ध करा चुकी है, ताकि डिजिटल पहुंच बढ़ सके। अब इन्हीं उपकरणों को कौशल विकास का माध्यम बनाया जाएगा। एप आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे, जिनसे युवा व्यावहारिक और उद्योग आधारित शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इसका मकसद है कि युवा सीधे रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।
100 करोड़ का बजट, साफ प्राथमिकता
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह केवल बजट नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता को दिखाता है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एआई और उन्नत तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार युवाओं को डिग्रीधारी नहीं, बल्कि दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है।
निवेश और उद्योग को मिलेगा बल
प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं में तेजी आई है। ऐसे में कुशल मानव संसाधन की जरूरत बढ़ी है। ‘टेक युवा समर्थ युवा’ योजना उद्योगों की इस जरूरत को पूरा करेगी। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे तो निवेश को भी गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
गांव से शहर तक समान अवसर
इस योजना का लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवा भी डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण ले सकेंगे। इससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और प्रदेश के हर हिस्से में समान अवसर मिलेंगे। सरकार की सबका साथ सबका विकास की सोच इसी तरह की योजनाओं से आगे बढ़ रही है।
क्या कहती है विशेषज्ञों की राय?
आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिन्द्र अग्रवाल का कहना है कि 25 लाख युवाओं को एआई और उन्नत डिजिटल तकनीकों में प्रशिक्षित करना केवल कौशल कार्यक्रम नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत है। उनके अनुसार यह कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक के लिए नई दिशा देगा और युवा शक्ति को नौकरी तलाशने वाली भीड़ से आगे बढ़ाकर नवाचार और निवेश को आकर्षित करने वाली दक्ष कार्यशक्ति में बदलेगा।
भविष्य में क्या होंगे फायदे?
इस योजना से युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, एआई आधारित उद्योगों में सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे, कंपनियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन मिलेगा और स्वरोजगार व स्टार्टअप की संभावनाएं मजबूत होंगी। कुल मिलाकर यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।






