Uttarakhand

पूर्व सैनिकों के अनुभव से मजबूत होगा आपदा तंत्र… रघुवीर सिंह भण्डारी ने संभाली नई जिम्मेदारी

आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया, गांव-गांव मौजूद पूर्व सैनिकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ने की तैयारी, खोज, बचाव और त्वरित राहत व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने पर जोर

देहरादून, 8 जून 2026:

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के नव नियुक्त उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस मौके पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने उनका स्वागत किया और नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दीं।

कार्यभार संभालने के बाद भण्डारी ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील राज्य है। ऐसे में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों, अनुभवों और प्रशिक्षित मानवबल का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है।

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य के अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की होगी। उनका कहना था कि उत्तराखंड के लगभग हर गांव में पूर्व सैनिक मौजूद हैं, जिनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और मैदानी अनुभव आपदा जोखिम कम करने, खोज एवं बचाव अभियान चलाने और सामुदायिक स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भण्डारी ने बताया कि राज्य से लेकर गांव स्तर तक आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और कारगर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने, आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करने पर भी फोकस रहेगा। इसके लिए युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और पूर्व सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की योजना है।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि भण्डारी का लंबा सैन्य, प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के लिए उपयोगी साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके मार्गदर्शन में विभाग की विभिन्न योजनाएं और पहल ज्यादा प्रभावी तरीके से आगे बढ़ेंगी।

लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी ने भारतीय सेना में करीब 38 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने थल सेना प्रशिक्षण स्कूल, लद्दाख स्काउट रेजीमेंटल सेंटर लेह, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडाउन, मराठा रेजीमेंट और नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन विजय में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

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