Uttarakhand

चारधाम यात्रा 2026: रिकॉर्ड भीड़ के बीच सिस्टम की बड़ी परीक्षा, सुरक्षा व सुविधा पर सरकार का फोकस

अक्षय तृतीया से शुरू हुई यात्रा में शुरुआती दिनों में ही लाखों रजिस्ट्रेशन, ऊंचाई, भीड़ और मौसम को देखते हुए प्रशासन ने मेडिकल, ट्रैफिक और रेस्क्यू प्लान मजबूत किए

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 30 अप्रैल 2026:

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल पहले ही हफ्ते में रफ्तार पकड़ चुकी है। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट 19 अप्रैल को खुले, जबकि केदारनाथ 22 अप्रैल और बद्रीनाथ 23 अप्रैल से श्रद्धालुओं के लिए खुल गया। शुरुआत के चार दिनों में ही साढ़े तीन लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन दर्ज हुए, जो इस बार रिकॉर्ड भीड़ के संकेत दे रहे हैं।

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यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद, सीएम खुद रख रहे व्यवस्था पर नजर

पिछले साल करीब 50 लाख और उससे पहले 45.45 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार आंकड़ा इससे आगे जाने की उम्मीद जताई जा रही है। मार्च तक ही 10 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके थे, जो अप्रैल के अंत तक 18 लाख के पार पहुंच गए। केदारनाथ और बद्रीनाथ सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने इस बार यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तर पर तैयारी की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार समीक्षा बैठकों के जरिए सड़क, पानी, स्वास्थ्य और ट्रैफिक व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।

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पर्यटन मंत्री बोले-तालमेल से विभाग कर रहे काम

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि सभी विभाग जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य टीम, होटल एसोसिएशन और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है। ऑफलाइन के लिए 70 काउंटर बनाए गए हैं, जिनमें ऋषिकेश, हरिद्वार और विकासनगर शामिल हैं। ये काउंटर 24 घंटे चल रहे हैं। यात्रियों को QR कोड पास और पहचान पत्र साथ रखने की हिदायत दी गई है।

यात्रा रूट पर हर दस किमी पर सेक्टर बना

सुरक्षा के लिहाज से करीब 7 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यात्रा रूट पर हर 10 किलोमीटर में सेक्टर बनाकर जवान लगाए गए हैं। 57 लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं जहां मशीनें लगातार काम कर रही हैं। केंद्र की ओर से अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं, जबकि बीआरओ सड़कें दुरुस्त करने में लगा है।

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यात्रियों की सेहत व सुविधा दोनों का ख्याल

केदारनाथ मार्ग पर सोलर लाइटें लगाई गई हैं ताकि रात में भी आवाजाही सुरक्षित रहे। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मेडिकल टीमों को अलर्ट रखा गया है। पोर्टेबल सिलेंडर की व्यवस्था की गई है और यात्रियों को धीरे-धीरे ऊंचाई पर चढ़ने की सलाह दी गई है, ताकि Acute Mountain Sickness से बचा जा सके।

यात्रा के दौरान ट्रिप कार्ड सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें वाहन, चालक और यात्रियों की पूरी जानकारी दर्ज होगी। साइबर ठगी से बचाव के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से करने को कहा गया है। यात्रा मार्ग पर फ्री टॉयलेट सुविधा अनिवार्य की गई है। पेट्रोल पंप, होटल और ढाबों में साफ-सफाई, सैनिटाइजर और हाइजीन को लेकर निर्देश जारी हुए हैं। कई जगहों पर साइन बोर्ड के जरिए अस्पताल, पेट्रोल पंप और रेस्टोरेंट की दूरी भी बताई जा रही है।

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भीड़ को ध्यान में रखकर बना ट्रैफिक प्लान

भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है, जिसमें वन-वे सिस्टम, डायवर्जन और वैकल्पिक पार्किंग शामिल है। डम्पिंग जोन को समतल कर पार्किंग में बदला जा रहा है। ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए हैं। भटवाड़ी, डबराड़ी चडेथी जैसे इलाकों में नदी का स्तर बढ़ने से सड़क प्रभावित न हो, इसके लिए भी निर्देश जारी हुए हैं। जीपीएस आधारित मशीनरी ट्रेकिंग लागू की गई है, जिसे जरूरत पड़ने पर अपडेट किया जाएगा।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

चारधाम यात्रा का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। शुरुआती बुकिंग में ही करोड़ों का कारोबार दर्ज हुआ है। होटल, ट्रांसपोर्ट और लोकल बाजारों में हलचल बढ़ गई है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा न करें, प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें और धीरे-धीरे ऊंचाई पर जाएं। प्रशासन का फोकस भीड़ को नियंत्रित रखते हुए यात्रा को लगातार चलाते रहने पर है।

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