
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 3 सितंबर 2026:
उत्तराखंड के रियल एस्टेट सेक्टर में GST देनदारी की जांच को लेकर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीमों ने देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर व हल्द्वानी में 16 रियल एस्टेट फर्मों के ठिकानों पर एक साथ जांच की। कार्रवाई के दौरान फर्मों ने 7.43 करोड़ रुपये की कर देनदारी स्वीकार करते हुए यह रकम मौके पर जमा कराई।
55 अधिकारियों की टीमें पहुंचीं
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर हुई कार्रवाई में 16 टीमों के 55 अधिकारी शामिल रहे। नोडल अधिकारी व संयुक्त आयुक्त अजय कुमार के समन्वय में विभाग की प्रवर्तन इकाइयों ने करीब 15 दिन तक बिल्डरों व उनसे जुड़ी संविदाकार फर्मों के कारोबार की जानकारी जुटाई। लेनदेन में संदिग्ध पैटर्न मिलने के बाद चारों शहरों में एक साथ जांच शुरू की गई।
खरीदार से पहले पूरी रकम लेने की आशंका
जांच में फ्लैट की बिक्री से जुड़ा एक अहम तरीका सामने आया है। विभाग को आशंका है कि कुछ मामलों में खरीदार से फ्लैट की पूरी रकम पहले ले ली गई, जबकि रजिस्ट्री Completion Certificate जारी होने के बाद कराई गई। ऐसे मामलों में कागजों पर बिक्री को Certificate जारी होने के बाद का दिखाने की कोशिश की गई हो सकती है। अब अधिकारी खरीदार से रकम मिलने की तारीख, रजिस्ट्री, बिक्री व Completion Certificate की तारीख का मिलान कर रहे हैं।
अपनी ही फर्मों से निर्माण, ITC पर नजर
जांच का दूसरा बड़ा हिस्सा बिल्डरों की अपनी निर्माण कंपनियों से जुड़ा है। विभाग को आशंका है कि कुछ बिल्डरों ने अपनी ही निर्माण फर्मों के जरिए प्रोजेक्ट का काम कराया। ऐसे मामलों में 18 प्रतिशत GST व नियमों के तहत Input Tax Credit का प्रावधान है। अधिकारियों को शक है कि कुछ मामलों में कागजों पर खरीद दिखाकर ITC का लाभ लिया गया।
बिल से लेकर बैंक भुगतान तक जांच
अधिकारियों ने अब बिल, भुगतान, सामान की वास्तविक सप्लाई, निर्माण कार्य व ITC क्लेम का मिलान शुरू किया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि जिन खरीद के आधार पर टैक्स क्रेडिट लिया गया, उनके पीछे वास्तविक लेनदेन हुआ था या सिर्फ दस्तावेजों के जरिए दावा किया गया।
कब्जे में लिए कारोबारी रिकॉर्ड
जांच के दौरान विभाग ने फ्लैट बिक्री, खरीदारों से मिले भुगतान, रजिस्ट्री, Completion Certificate, खरीद-बिक्री, फर्मों के आपसी लेनदेन व ITC से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। इन रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद वास्तविक कर देनदारी तय की जाएगी। अनियमितता मिलने पर संबंधित फर्मों के खिलाफ आगे की कार्रवाई होगी।






