लखनऊ, 20 मार्च 2026:
यूपी में स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। अब यह बदलाव जमीन पर साफ दिखाई भी देने लगा है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है।
वर्ष 2017 में ऐसे स्टार्टअप्स की संख्या मात्र 174 थी। 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2525 पहुंच गया। 31 जनवरी 2026 तक 301 नए स्टार्टअप्स में भी महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है। ये सभी स्टार्टअप्स डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। यह इस बढ़ती भागीदारी को औपचारिक रूप से प्रमाणित करते हैं। इस तेजी के पीछे राज्य सरकार की नीतियों को अहम माना जा रहा है।
सीएम सरकार ने प्रदेश में निवेश अनुकूल माहौल बनाने, प्रक्रियाओं को सरल करने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका सकारात्मक असर महिला उद्यमिता पर भी पड़ा जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्टार्टअप्स में निदेशक और साझेदार की भूमिका निभा रही हैं।
केंद्र सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने भी इस बदलाव को गति दी है। फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं के माध्यम से स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता मिल रही है। इन योजनाओं का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, खासकर महिलाओं को भी मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला भागीदारी में यह निरंतर वृद्धि इस बात का संकेत है कि प्रदेश में उद्यमिता का दायरा तेजी से व्यापक हो रहा है। उत्तर प्रदेश अब राष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते स्टार्टअप हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यह आर्थिक विकास को नई दिशा देने के साथ महिला सशक्तीकरण का एक प्रभावी मॉडल भी बनता जा रहा है।






