योगी कैबिनेट के बड़े फैसले : एआई मिशन से हरित ईंधन तक निवेश, स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में मौका
एसएएफ उत्पादन से लेकर नए शहरों के विकास तक कई प्रस्तावों को मंजूरी, पांच लाख युवाओं को एआई की ट्रेनिंग, मीरजापुर-विंध्याचल और मुजफ्फरनगर की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये जारी होंगे, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का बढ़ेगा उत्पादन

लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश में तकनीक, निवेश, रोजगार और शहरी विकास को गति देने के लिए योगी सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश एआई मिशन की स्थापना, स्टार्टअप्स के लिए ई-मार्केटप्लेस, सतत विमानन ईंधन विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और नए शहरों के विकास के लिए वित्तीय सहायता समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों के जरिए प्रदेश में एआई आधारित सेवाओं, नवाचार, हरित ऊर्जा, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
पांच लाख युवाओं को एआई की ट्रेनिंग, 100 स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश एआई मिशन (यूपी-एआईएम) की स्थापना, क्रियान्वयन और संचालन को मंजूरी दी है। मिशन के तहत कम से कम पांच लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षित करने और 50 हजार फॉरवर्ड डिप्लॉयड एआई प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य है। इसके अलावा कम से कम 100 एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय और गैर-वित्तीय सहायता दी जाएगी। मिशन के तहत 100 से अधिक एआई उपयोग-प्रकरण विकसित या लागू किए जाएंगे, जबकि 25 से 30 उपयोग-प्रकरणों को बड़े स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। प्रदेश के सभी 75 जिलों में डिस्ट्रिक्ट एआई केंद्र विकसित होंगे। इन केंद्रों के जरिए स्थानीय समस्याओं के समाधान, प्रशिक्षण, रोजगार, अनुसंधान और स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के मुताबिक, मिशन के तहत एकीकृत यूपी एआई स्टैक विकसित किया जाएगा। इसमें एआई आधारित डेटा व्यवस्था, विभागीय एप्लीकेशन, सुरक्षित डेटा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म और जीपीयू आधारित कंप्यूटिंग की सुविधाएं शामिल होंगी। एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए गोपनीयता, जोखिम मूल्यांकन और मानव पर्यवेक्षण पर भी जोर दिया जाएगा। मिशन को आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में संचालित किया जाएगा।
स्टार्टअप्स के उत्पादों की सरकारी खरीद के लिए बनेगा ई-मार्केटप्लेस
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र स्टार्टअप्स के उत्पादों, सेवाओं और तकनीकी समाधानों को सरकारी खरीद के लिए सूचीबद्ध करने के उद्देश्य से यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस स्थापित किया जाएगा। इस व्यवस्था से सरकारी विभागों और अन्य अभिकरणों को स्टार्टअप्स के नवोन्मेषी उत्पादों और सेवाओं की खरीद का अवसर मिलेगा। खरीद करने वाले विभाग अपनी स्वीकृत बजटीय व्यवस्था से भुगतान करेंगे। ई-मार्केटप्लेस की स्थापना, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन संभालेगा।
योजना का उद्देश्य स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच आसान बनाना, उनके कारोबार का विस्तार करना और नए रोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकारी सेवाओं में तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल से उनकी गुणवत्ता, दक्षता और सुगमता बढ़ाने की भी उम्मीद है।

यूपी में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश को सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, निजी निवेश आकर्षित करने और हरित रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना है।
नीति में कृषि अवशेष, नगरीय अपशिष्ट और अखाद्य तिलहनों से एसएएफ उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। धान की भूसी, गेहूं का भूसा और गन्ने की बगास जैसे कृषि अवशेषों के इस्तेमाल से ग्रामीण क्षेत्रों में नई मूल्य श्रृंखला विकसित करने और किसानों की आय के विकल्प बढ़ाने पर जोर है। नीति के तहत 200 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली एसएएफ इकाइयों को तीन श्रेणियों में रखा गया है। 200 से 500 करोड़ रुपये तक निवेश वाली इकाइयां वृहद, 500 से 1,500 करोड़ रुपये तक निवेश वाली इकाइयां मेगा और 1,500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली इकाइयां अल्ट्रा मेगा श्रेणी में आएंगी।
इन इकाइयों को स्टांप ड्यूटी में छूट या प्रतिपूर्ति, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार और विकास शुल्क में छूट, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी, 10 साल तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट और कौशल विकास सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाएंगे। जरूरत के मुताबिक कस्टमाइज्ड पैकेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का भी प्रावधान है। नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहनों के लिए यूपीनेडा को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह नीति लागू होने की तारीख से पांच साल तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।
दो शहरों के विकास के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त मंजूर
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत मीरजापुर-विंध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। दोनों विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 164.87 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमन्य की गई है। इसमें से पहली किस्त के तौर पर 115 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए शहरों के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ नगरीय क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास करना है। शासन ने 6 अप्रैल 2023 को योजना लागू की थी। इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध करा सकती है। यह सहायता अधिकतम 20 साल की अवधि के लिए दी जा सकती है।
फैसलों से निवेश, तकनीक और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी
कैबिनेट के इन फैसलों में तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था, उद्यमिता, हरित ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे को प्रमुखता दी गई है। एआई मिशन के जरिए सरकारी कामकाज और नागरिक सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है। वहीं, स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस से नए उद्यमों को सरकारी खरीद में अवसर मिलने की उम्मीद है।
एसएएफ नीति के जरिए बड़े निवेश और कृषि अवशेषों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की तैयारी है, जबकि नए शहरों के लिए वित्तीय सहायता का उद्देश्य नियोजित शहरी विस्तार को गति देना है। सरकार की इन पहलों का फोकस तकनीकी नवाचार, निवेश, रोजगार और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार पर है।






