
लखनऊ, 20 सितंबर 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में नौ दिनों तक किताबों, साहित्य, संस्कृति और कला का सजा संसार रविवार को सुरों के साथ विदा हो गया।गोमती पुस्तक महोत्सव में 4.5 लाख से अधिक पुस्तक प्रेमियों और दर्शकों की आमद रही, जबकि 2.75 करोड़ रुपये की पुस्तकों की बिक्री दर्ज की गई। 250 से अधिक स्टॉल और 75 से ज्यादा कार्यक्रमों ने महोत्सव को ज्ञान और रचनात्मकता के बड़े मंच में बदल दिया। महोत्सव में 240 से अधिक वक्ताओं और कलाकारों ने सहभागिता की। बाल गतिविधियों में 15 हजार से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया।

समापन समारोह में प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पहुंचे। उन्होंने विभिन्न पुस्तक स्टॉल का जायजा लिया और पुस्तकों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने डॉ. अमिताभ कुमार की दो पुस्तकों ‘लखनऊ शहर-ए-अदब’ और ‘इंडियन रेलवे : फ्रॉम स्टीम टू स्पीड’ का लोकार्पण किया। पहली पुस्तक लखनऊ की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराती है जबकि दूसरी भारतीय रेल के सफर, तकनीकी बदलाव और विकास यात्रा को केंद्र में रखती है।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। आरडीएसओ के अपर महानिदेशक काजी मेराज अहमद ने अध्यक्षता की। जीएम/आरवीएनएल अनिल कुमार सिंह, राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम, आईएएस जय सिंह, लेखक-स्तंभकार रहीस सिंह, पत्रकार नवलकांत सिंह, प्रकाशक नीरज अरोड़ा समेत साहित्य, प्रशासन, उद्योग और प्रकाशन जगत की हस्तियां मौजूद रहीं।
बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में समापन दिवस पर करीब 2200 विद्यार्थियों ने योग, कहानी, वॉइस-ओवर, आपदा प्रबंधन और कला से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया। ‘बच्चों के लिए योग’ में योग, ध्यान और संतुलन की जानकारी दी गई। ‘कहानी की पोटली’ में कहानी और संगीत ने बच्चों को जोड़ा, जबकि वॉइस-ओवर वर्कशॉप में आवाज, उच्चारण, गति और पिच का अभ्यास कराया गया।

आपदा प्रबंधन सत्र में बच्चों को भूकंप जैसी आपदाओं से बचाव की बुनियादी जानकारी मिली। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की मंडला आर्ट वर्कशॉप में बच्चों ने रंगों से अपनी कल्पना को आकार दिया। ई-पुस्तकालय का शुभंकर चीता भी बच्चों के आकर्षण का केंद्र रहा।
साहित्य से पत्रकारिता तक खुला संवाद
समापन दिवस पर The Dust on My Heart पर लेखिका मीरा (समर खान) ने रचना-प्रक्रिया और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर चर्चा की। ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्र और प्रो. संजय मोहन जौहरी ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी, सोशल मीडिया, एआई और फेक न्यूज जैसी चुनौतियों पर विचार रखे।
‘लेखक से मिलिए’ में रहीस सिंह और डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने ‘कैकेयी के राम’ पर संवाद किया। वहीं डॉ. रजनी गुप्त ने पद्मश्री विद्याबिंदु सिंह से लोक साहित्य, लोक परंपराओं और बाल साहित्य पर बातचीत की। शाम ढली तो ‘भक्ति बीट्स’ ने भजन जैमिंग के जरिए महोत्सव को सुरमयी विदाई दी। नौ दिनों तक किताबों के बहाने लखनऊ में उमड़ा यह साहित्यिक हुजूम अब अगले संस्करण की उम्मीद छोड़ गया।






