68,500 शिक्षक भर्ती : आरक्षण विसंगति पर अभ्यर्थियों का विधानसभा के सामने प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
63 दिनों से ईको गार्डन में धरना और सात दिन से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने की संशोधित परिणाम व नियुक्ति की मांग, पुलिस ने बसों में भरकर वापस भेजा

लखनऊ, 2 नवंबर 2026:
यूपी में 68,500 शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 की आरक्षण विसंगति का मामला लगातार गरमाया है। 63 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में धरना दे रहे अभ्यर्थियों का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर उतर आया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विधानसभा के सामने पहुंचकर प्रदर्शन किया और सरकार से आरक्षण विसंगति दूर कर संशोधित परिणाम जारी करने तथा पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग उठाई। इस दौरान अभ्यर्थी सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर बसों में भरकर वापस ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प भी हुई।
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को समान अर्हता मानकों पर रखकर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई। ओबीसी अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए। अभ्यर्थियों ने इस संबंध में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार संबंधित संस्थाओं ने भी उनके पक्ष में संस्तुतियां और आदेश जारी किए हैं।
अभ्यर्थियों की मांग है कि ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम का पुनरीक्षण किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। इसके साथ ही आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए।

मंत्री की बैठक में उठा था मामला, अब तक नहीं निकला समाधान
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष वर्मा और तूफान सिंह ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अभ्यर्थियों के मुताबिक मंत्री ने उनकी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
‘दस्तक दो अभियान’ के बाद भी नहीं मिला न्याय
तूफान सिंह के अनुसार अभ्यर्थियों ने पिछले 63 दिनों में ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई मंत्रियों, भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के आवास एवं कार्यालयों पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपे। इनमें ओमप्रकाश राजभर, संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई नेता शामिल हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।

सात दिन से भूख हड़ताल, महिला अभ्यर्थियों ने भी जताई नाराजगी
आशुतोष वर्मा ने बताया कि कई अभ्यर्थी सात दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी स्थिति बिगड़ रही है। महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम कठिनाइयों के बावजूद न्याय की उम्मीद में धरने पर डटे हैं। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार और लंबित नियुक्ति के लिए है।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार आरक्षण विसंगति दूर करने और नियुक्ति को लेकर ठोस लिखित निर्णय नहीं लेती तब तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। विधानसभा के सामने हुए प्रदर्शन में सचिदानंद, रामप्रवेश, विनोद प्रजापति, गायत्री जायसवाल, संतोष, इकबाल, नसीम, दीपक पटेल, उत्कर्ष वर्मा, संजीव, मनोज, अमित, भूपेन्द्र, अरविंद, अजीत, इशिता पाल, गरिमा, प्रतिमा कुशवाहा, गोस्वामी सहित विभिन्न जनपदों से आए तमाम अभ्यर्थी शामिल रहे।






