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UP Govt Jobs : पुलिस सत्यापन का इंतजार खत्म! चयनित युवाओं को पहले मिलेगा नियुक्ति पत्र, 30 दिन में सत्यापन

योगी सरकार ने जारी की चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन की नई एकीकृत नीति, पुलिस घर जाकर नहीं करेगी पूछताछ, केवल मुकदमा दर्ज होने से भी नहीं अटकेगी नियुक्ति

लखनऊ, 30 अक्टूबर 2026:

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चयनित युवाओं को अब चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट आने तक नियुक्ति पत्र का इंतजार नहीं करना होगा। योगी सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए चरित्र सत्यापन की नई एकीकृत नीति जारी की है। इसके तहत पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले भी चयनित अभ्यर्थियों को शर्तों के साथ नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा। सत्यापन रिपोर्ट अनुकूल मिलने पर नियुक्ति की पुष्टि कर दी जाएगी। वहीं, पुलिस और संबंधित अधिकारियों को 30 दिन के भीतर सत्यापन रिपोर्ट देनी होगी।

प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार अब केवल चरित्र सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी। नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी से निर्धारित सत्यापन प्रपत्र और स्वघोषणा पत्र लेकर नियुक्ति पत्र जारी कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील पदों पर विस्तृत सत्यापन पूरा होने के बाद ही नियुक्ति दी जाएगी। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन भी जरूरी होगा।

पुलिस घर नहीं आएगी, अभ्यर्थियों को कार्यालयों के चक्कर से राहत

नई नीति में सत्यापन प्रक्रिया को अभ्यर्थी के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। सामान्य परिस्थितियों में पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी। न ही उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया जाएगा। अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की भी जरूरत नहीं होगी। पुलिस उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कर रिपोर्ट भेजेगी।

डीजी (अभिसूचना) और डीएम को संदर्भ मिलने के 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। तय समय सीमा में रिपोर्ट नहीं मिलने पर नियुक्ति प्राधिकारी मामला गृह विभाग को भेजेंगे जो रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा।

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केस दर्ज होने पर नहीं होगी सीधी अयोग्यता

सरकार ने आपराधिक मामलों में भी अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। केवल एफआईआर दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने से कोई अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। अपराध की प्रकृति और न्यायालय में मामले की स्थिति के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। कुछ गंभीर अपराधों में आरोप तय होने या दोषसिद्धि पर अयोग्यता लागू होगी। अन्य मामलों में दोषसिद्धि जरूरी होगी। अभ्यर्थियों को अपने खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी जानकारी देनी होगी। तथ्य छिपाने या गलत घोषणा करने पर नियुक्ति निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकेगी।

प्रतिकूल रिपोर्ट पर अभ्यर्थी को मिलेगा सुनवाई का मौका

यदि पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट प्रतिकूल आती है तो अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। डीएम रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को भेजने से पहले उसकी सुनवाई करेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी पूरी की जा सकेगी। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं होगा।

पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश के बाहर एक वर्ष या उससे अधिक समय तक रहने वाले अभ्यर्थियों के बारे में संबंधित राज्य की पुलिस से भी जानकारी ली जाएगी। यह नीति सरकारी विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर भी लागू होगी। पहले से लंबित सत्यापन मामलों का निस्तारण भी नई नीति के तहत किया जाएगा।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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