
बाराबंकी, 21 सितंबर 2026:
यूपी के बाराबंकी में निर्माणाधीन पोल्ट्री फार्म के परिसर में बारिश के पानी से बने तालाब में नहाने गए तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। हादसा कुर्सी थाना क्षेत्र के बैना टीकाहार गांव के बाहर हुआ। मृतकों की पहचान देवा (15), सुमित (15) और दिव्यांश (13) के रूप में हुई है। दिव्यांश का शव करीब चार घंटे की तलाश के बाद रात पौने नौ बजे निकाला जा सका।

गर्मी से परेशान होकर पोल्ट्री फॉर्म के अंदर तालाब में उतरे बच्चे
गांव से करीब 500 मीटर दूर पोल्ट्री फार्म का निर्माण चल रहा है। परिसर में दीवारें खड़ी हो चुकी हैं। मिट्टी की पटाई के लिए वहां करीब 100 मीटर चौड़ाई में गहरी खोदाई की गई थी। बारिश का पानी भरने के बाद यह जगह तालाब में बदल गई। रविवार शाम करीब पांच बजे शंकर का बेटा सुमित व गुड्डू गौतम का बेटा देवा और धर्मराज का बेटा दिव्यांश अन्य बच्चों के साथ फार्म परिसर में पहुंच गए। बताया गया कि बच्चे दोपहर से भैंस चरा रहे थे। गर्मी और प्यास लगने के बाद उन्होंने तालाब में नहाने का फैसला किया। करीब छह से सात फीट ऊंची बाउंड्री लांघकर तीनों अंदर गए और पानी में उतर गए।
शोर सुनकर पहुंचे काम कर रहे मजदूर
नहाते समय तीनों बच्चे गहरे पानी में चले गए। उनके साथ मौजूद बच्चों ने शोर मचाया तो फार्म में काम कर रहे मजदूर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से देवा और सुमित को पानी से बाहर निकाला गया। दोनों को लखनऊ के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिव्यांश का उस समय पता नहीं चल सका। इसके बाद ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद रात पौने नौ बजे उसका शव भी पानी से बाहर निकाल लिया गया।

चौकीदार की मौजूदगी के बावजूद बच्चों के अंदर आने की भनक नहीं लगी
सीओ फतेहपुर जगत कन्नौजिया ने बताया कि तालाब निर्माणाधीन फार्म परिसर के अंदर है। चारों तरफ करीब छह से सात फीट ऊंची बाउंड्री बनी है। फार्म की रखवाली के लिए चौकीदार भी है, लेकिन परिसर बड़ा होने की वजह से बच्चों के अंदर पहुंचने की जानकारी उसे नहीं हो सकी। खोजबीन में स्थानीय गोताखोर व SDRF के साथ ग्रामीण भी लगे रहे।
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— Barabanki Police (@Barabankipolice) September 20, 2026
तीनों के पिता करते हैं मजदूरी, गांव में पसरा मातम
देवा तीन भाइयों में सबसे छोटा था। सुमित दो भाइयों में छोटा था, जबकि दिव्यांश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। तीनों बच्चों के पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। तीनों बच्चों की मौत की खबर गांव पहुंचते ही घरों में चीख-पुकार मच गई। दिव्यांश का शव बाहर आते ही उसकी मां उससे लिपटकर रोने लगी और कुछ देर बाद बेसुध हो गई। पिता भी बेटे का शव देखकर खुद को संभाल नहीं सके। देवा के पिता गुड्डू गौतम भी बार-बार बेहोश हो रहे थे। सुमित के घर में भी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।






