
लखनऊ, 31 अगस्त 2026:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेशवासियों के नाम अपनी चिट्ठी लिखकर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और विकसित उत्तर प्रदेश का संदेश दिया है। ‘योगी की पाती’ नाम से लिखी चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और गीता के संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृष्ण का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं अपितु सत्य, धर्म, कर्म, समानता और लोककल्याण की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों को 5 सितंबर को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं।
मुख्यमंत्री ने चिट्ठी की शुरुआत श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग से करते हुए कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में नंदलाला का प्राकट्य असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य एवं धर्म के प्रकाश के प्रस्फुटन का प्रतीक है। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं को आध्यात्मिक संदेशों से जोड़ते हुए माखन चोरी में सहजता-निश्छलता, गोप-गोपियों के साथ संबंधों में प्रेम-समरसता और कालिय नाग के दमन में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश बताया।
गोवर्धन से ‘सामूहिक शक्ति’ का संदेश
सीएम योगी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन समाज की सामूहिक शक्ति और सहकारिता का महत्व बताता है। गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला को उन्होंने प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण तथा सामूहिक एकजुटता का संदेश बताया। वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की स्मृतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ब्रजभूमि को सनातन सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र बताया।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में जब नंदलाला का प्राकट्य हुआ, तब असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य और धर्म का प्रकाश प्रस्फुटित हुआ।
योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा भी… pic.twitter.com/5ZPI9D0LoI
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 31, 2026
‘कृष्ण कुलीनता नहीं, समरसता के प्रतीक’
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण को कुलीनता के बजाय समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने द्वारकाधीश कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चे रिश्ते पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं बनते हैं। वे आत्मीयता से बनते हैं। सांदीपनि ऋषि के आश्रम में कृष्ण के ज्ञान अर्जन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समानता और आत्मीयता आज के समाज की बड़ी आवश्यकता है।
कृष्ण के ‘लोकमंगल’ से सरकार के कामकाज को जोड़ा
चिट्ठी में सीएम योगी ने श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण और लोकमंगल कृष्ण के जीवन-दर्शन के प्रमुख आधार रहे हैं। इसी भावना के साथ सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार, अन्नदाताओं को सहारा और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर लोककल्याण की इसी भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने गीता में श्रीकृष्ण के कर्म, ज्ञान और कर्तव्य के संदेश को आज के जीवन के लिए भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों से जन्माष्टमी पर अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक समरसता और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की।






