एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 15 जून 2026:
राजधानी स्थित मोहनलालगंज और नगराम क्षेत्र में पिछले 26 साल के दौरान पटाखों से जुड़े हादसों में 26 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन बारूद का यह खतरनाक कारोबार अब भी नहीं थमा है। सोमवार को नगराम के देवती गांव के बाहर स्थित एक लाइसेंसी पटाखा गोदाम में हुए जोरदार विस्फोट ने एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में एक युवती ने दम तोड़ दिया। युवक की हालत गंभीर बनी है। धमाके से गोदाम की इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं दो बाइक खाक हो गईं।
जानकारी के मुताबिक देवती गांव के बाहर स्थित पटाखा गोदाम में दोपहर के समय अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि गोदाम की कोठरी की छत और दीवारें उड़ गईं। मलबे में दबकर वहां खड़ीं दो बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गईं और आग लगने से जल गईं।

हादसे के समय गोदाम के पास मौजूद 22 वर्षीय मारिया और मोहित इसकी चपेट में आ गए। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन मारिया को तत्काल सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां थोड़ी देर बाद ही वो जिंदगी की जंग हार गई। वहीं मोहित का इलाज चल रहा है।
गोदाम के लाइसेंस धारक शफीक ने बताया कि सहालग के चलते गोला-पटाखा तैयार करने की तैयारी चल रही थी। बारूद और तैयार सामग्री गोदाम में रखी थी। घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे, इसलिए विस्फोट की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
सूचना मिलते ही नगराम पुलिस, एसीपी, एसडीएम, अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू पाया, जबकि एसडीआरएफ ने बचाव कार्य चलाया। डीसीपी दक्षिण अमित कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि विस्फोट एक लाइसेंसी गोदाम में हुआ है और मामले की जांच कराई जा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक विस्फोट की आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद ईंटें और पटाखों के अवशेष सैकड़ों मीटर तक बिखरे मिले। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल रहा। पुलिस के अनुसार गोदाम रिहायशी इलाके से करीब 500 मीटर दूर स्थित है और इसका लाइसेंस वर्ष 2026 तक वैध है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि पटाखा बनाने के काम में बच्चों को भी लगाया जाता है और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता।
बारूद की सप्लाई व स्टोरेज पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बारूद की सप्लाई और स्टोरेज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नियमों के बावजूद बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री क्षेत्र में पहुंचती रहती है। उनका आरोप है कि कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बारूद और पटाखों का भंडारण किया जाता है।
पटाखों के हादसों का काला रिकॉर्ड
मोहनलालगंज और आसपास के इलाकों में पटाखों से जुड़े हादसों का इतिहास लंबा और दर्दनाक रहा है। पिछले 26 वर्षों में ऐसे हादसों में 26 लोगों की जान जा चुकी है।
– सितंबर 1998 में सिसेंडी गांव में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत
– 7 अक्टूबर 2004 को कल्ली गांव में हुए विस्फोट में पूरा मकान ढहा, तीन लोगों की मौत
– इसी महीने गोसाईगंज में तीन मंजिला इमारत में हुए धमाके में एक व्यक्ति की जान गई
– 20 मई 2008 को जैतीखेड़ा गांव में पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत
– 12 सितंबर 2012 को कनकहा गांव में हुए धमाके में तीन मकान गिरे, दो महिलाओं ने दम तोड़ा
– 20 सितंबर 2014 को सिसेंडी में दो मकान जमींदोज व 16 लोगों की मौत






