Lucknow City

ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंचीं सरकारी सेवाएं… 57 हजार ग्राम सचिवालय बने नई पहचान

24,311 पंचायत भवनों से मजबूत हुआ ग्रामीण प्रशासन, डिजिटल तकनीक और एआई से बढ़ी पारदर्शिता व जवाबदेही

लखनऊ, 2 जून 2026:

यूपी के गांव अब कृषि और पारंपरिक जीवनशैली तक सीमित न रहते हुए तेजी से डिजिटल और प्रशासनिक रूप से सशक्त इकाइयों में बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और सुशासन को मजबूत करने के लिए प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय खोले गए हैं। इससे सरकारी सेवाएं अब ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंच रही हैं।

ग्राम सचिवालयों के संचालन से गांव के लोगों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने, जन्म-मृत्यु पंजीकरण कराने, पेंशन योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा मनरेगा संबंधी सेवाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार तहसील या ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

ग्रामीण प्रशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पांच वर्षों में प्रदेश भर में 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया है। ये भवन अब गांवों में प्रशासनिक गतिविधियों, जनसुनवाई, पंचायत बैठकों और विकास योजनाओं की निगरानी के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं। स्थायी कार्यालय मिलने से पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

सरकार ने ग्राम सचिवालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया है। यहां फर्नीचर, कम्प्यूटर, इंटरनेट, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही हर ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर की तैनाती की गई है। इससे ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं आसानी से मिल रही हैं।

तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए ग्राम पंचायतों को भेजी जाने वाली धनराशि के भुगतान के लिए जियो-फेन्स्ड और क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है। ग्राम सचिवालयों में स्थापित कम्प्यूटरों के माध्यम से होने वाले इन भुगतानों से वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। विभाग के अनुसार एआई मॉडल की मदद से खर्च की निगरानी भी की जा रही है जिससे धनराशि के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

इसके अलावा समस्याओं के त्वरित समाधान और बेहतर संवाद व्यवस्था के लिए राज्य स्तरीय कॉल सेंटर तथा ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम भी लागू किया गया है। वहीं, पंचायतों के तकनीकी कार्यों को मजबूती देने के लिए 1,875 पंजीकृत आर्किटेक्ट और कंसल्टिंग इंजीनियर (सिविल) का इम्पैनलमेंट किया गया है।

ग्राम सचिवालयों और पंचायत भवनों का यह व्यापक नेटवर्क प्रदेश के गांवों को डिजिटल, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ सुशासन की नई मिसाल स्थापित कर रही है।

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