योगेंद्र मलिक
हरिद्वार, 9 जून 2026ः
उत्तराखंड में होने वाले अर्द्ध कुंभ 2027 की तैयारियों के तहत प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शहर में लगाए जाने वाले सार्वजनिक साइन व नोटिस बोर्ड तीन भाषाओं में लगाए जाएंगे। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत शामिल है। वहीं, शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने हरिद्वार पहुंचकर सीसीआर भवन सभागार में कुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा की। साथ ही विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण कर उनकी प्रगति जानी।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सभी विभागों की जिम्मेदारी है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ करें। कहा कि कुंभ मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राम सिंह कैड़ा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और वर्षा ऋतु से पहले अधिकतम प्रगति सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए वर्तमान समय का अधिकतम उपयोग करते हुए परियोजनाओं को गति प्रदान की जाए। कहा कि यदि किसी परियोजना में तकनीकी, प्रशासनिक अथवा अन्य किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो उसे तत्काल सक्षम अधिकारियों एवं शासन के संज्ञान में लाया जाए। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कुंभ मेले के लिए शंकराचार्यों को भी सादर आमंत्रित किया है। हरिद्वार भ्रमण के दौरान मंत्री ने सीसीआर-2 भवन व एडमिन रोड के निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया।
मेला अधिकारी सोनिका ने कुंभ मेले से संबंधित कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए टाइम लाइन निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन घाटों के कार्यों को समय पर पूर्ण कराने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर गंगा नहर की आगामी क्लोजर अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। बैठक में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन ने निर्णय लिया है कि साइन व नोटिस बोर्ड हिंदी व अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत भाषा में भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड की दूसरी आधिकारिक भाषा संस्कृत को बढ़ावा देना और हरिद्वार की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाना है। इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संस्कृत और भाषा विद्वानों की सेवाएं ली जा रही हैं। उनका दायित्व यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी अनुवाद शुद्ध हों और आसानी से समझे जा सकें।






