लखनऊ, 10 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके हजरतगंज के नरही में लगभग 90 वर्षों से संचालित विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल पर लगाया गया ताला आखिरकार बुधवार को खुल गया। छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों के लगातार आवाज उठाने तथा सीएम योगी आदित्यनाथ से लगाई गई गुहार का असर दिखाई दिया। कई दिन तक बंद रहे विद्यालय के दरवाजे खुलते ही छात्राओं और शिक्षकों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ नजर आई।

विद्यालय पर ताला लगाए जाने का मामला बीते शनिवार को उस समय सुर्खियों में आया था जब अचानक स्कूल बंद होने से नाराज छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक सड़कों पर उतर आए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल एक भवन का विवाद नहीं बल्कि सैकड़ों बच्चियों के भविष्य का सवाल है। विरोध प्रदर्शन में स्थानीय नागरिकों के साथ सपा नेता बद्री यादव और विधायक रविदास मेहरोत्रा भी शामिल हुए थे।
जानकारी के अनुसार गत 4 जून को हजरतगंज पुलिस ने एडीएम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विद्यालय का कब्जा विपक्षी पक्ष को सौंप दिया था। इसके बाद स्कूल पर ताला लगा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विद्यालय प्रबंधन ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए प्रशासन और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।

बुधवार को स्कूल खुलने की उम्मीद में बड़ी संख्या में छात्राएं सुबह से ही विद्यालय के बाहर पहुंच गईं। घंटों इंतजार के बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में ताला खुलवाया गया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि एडीएम कोर्ट ने सोमवार को कथित बिल्डर द्वारा लगाए गए ताले को हटाने का आदेश दिया था लेकिन कुछ कारणों से यह कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी थी।
विद्यालय प्रबंधक संतोष रस्तोगी का दावा है कि जिस भूमि पर स्कूल संचालित हो रहा है वह शिक्षा के उद्देश्य से दान में दी गई थी। उनका आरोप है कि भूमिदाता की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने कथित फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर संपत्ति पर दावा किया और उन्हीं दस्तावेजों के सहारे विद्यालय को बंद कराने का आदेश हासिल कर लिया। प्रबंधन का यह भी कहना है कि उन्हें न तो कोई वैधानिक नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका रश्मि ने आरोप लगाया कि ताला लगाने के दौरान विद्यालय के महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक अभिलेखों को बोरे में भरकर रख दिया गया। इससे बारिश के कारण कई रिकॉर्ड भीग गए और अलमारियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इस घटना ने अभिभावकों और छात्राओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।
प्रदर्शन में पहुंचे विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि यह विद्यालय देश की आजादी से पहले से संचालित हो रहा है। ऐसे संस्थान को बंद करना बच्चियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं और दबंगों ने जबरन स्कूल का बोर्ड हटाकर परिसर पर ताला लगा दिया था।

बुधवार को स्कूल का ताला खुलवाने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा, जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा, सपा नेता बद्री यादव, कांग्रेस नेता सुभाष श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी पहुंचे थे। हालांकि विद्यालय के दरवाजे दोबारा खुल गए हैं लेकिन जमीन और स्वामित्व को लेकर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। फिलहाल छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि शिक्षा के इस ऐतिहासिक संस्थान का भविष्य सुरक्षित रहेगा।






