न्यूज डेस्क, 12 जून 2026:
उत्तराखंड में रियल एस्टेट सेक्टर को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में सरकार ने बड़े सुधारों की तैयारी शुरू कर दी है। देहरादून में हुई आवास एवं राज्य सम्पत्ति विभाग की समीक्षा बैठक में रेरा की कार्यप्रणाली को मजबूत करने, अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने, परियोजनाओं की निगरानी बढ़ाने और खरीदारों के हितों की सुरक्षा से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, असम और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में लागू रेरा व्यवस्थाओं का अध्ययन कराया जाएगा। इसके आधार पर उत्तराखंड के लिए बेहतर मॉडल तैयार कर सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
बैठक में रेरा के ऑनलाइन पोर्टल को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रणाली से जोड़ने का सुझाव भी सामने आया। इससे परियोजनाओं के पंजीकरण और मंजूरी की प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और तय समयसीमा के भीतर पूरी हो सकेगी।
एक अहम प्रस्ताव के तहत रेरा पंजीकरण के बाद किसी परियोजना के स्वीकृत नक्शे में बदलाव करने से पहले कम से कम दो-तिहाई आवंटियों की सहमति लेना जरूरी बनाने पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इससे फ्लैट और प्लॉट खरीदारों के अधिकारों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
बैठक में बिल्डर और प्रमोटर पंजीकरण व्यवस्था को भी मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। प्रस्ताव रखा गया कि डेवलपर्स की पुरानी परियोजनाओं का रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि खरीदार निवेश से पहले उनके कामकाज का इतिहास देख सकें।
राज्य में बढ़ रही अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति निर्माण गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तरह के मामलों पर रेरा की भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत अध्ययन किया जाए। साथ ही विकास प्राधिकरणों द्वारा सीलिंग, ध्वस्तीकरण या अन्य कार्रवाई की जानकारी रेरा के साथ साझा करने की व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनी।
बैठक में परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की जरूरत पर भी बल दिया गया, ताकि निवेशकों और खरीदारों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। रेरा के प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल ने बताया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली अथवा आठ से ज्यादा निर्मित इकाइयों वाली सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए विज्ञापन, बुकिंग, आवंटन और बिक्री से पहले रेरा में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि परियोजना और एजेंट पंजीकरण के आवेदनों के निस्तारण के लिए 30 कार्य दिवस की समयसीमा तय है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में गठन के बाद से अब तक राज्य में 689 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। हिमालयी राज्यों में परियोजना पंजीकरण के मामले में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है, जबकि 510 पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के साथ राज्य पहले स्थान पर बना हुआ है।
शिकायत निस्तारण के मोर्चे पर भी रेरा का प्रदर्शन बेहतर रहा है। अब तक प्राप्त 1342 शिकायतों में से 86 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है। वहीं सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स के जरिए मिली शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया है।
बैठक में बैंक अकाउंट डायरेक्शन-2025 के क्रियान्वयन की जानकारी भी दी गई। इसके तहत हर रियल एस्टेट परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते खोलने का प्रावधान किया गया है, जिससे परियोजना से जुड़े धन के इस्तेमाल पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।
बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, अनु सचिव नरेंद्र सिंह रावत, अनुभाग अधिकारी राहुल सुन्दरियाल, सदस्य पंकज कुलश्रेष्ठ, सहायक अभियंता आनंद शंकर समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






